लखनऊ। श्रद्धा मानव सेवा कल्याण समिति ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और बिसारिया शिक्षा एवं सेवा समिति के सहयोग से एक विशेष नाट्य मंचन का आयोजन किया। अवध एकेडमी इंटर कॉलेज के प्रेक्षागृह में प्रसिद्ध लेखक सागर सरहदी द्वारा लिखित नाटक ‘मसीहा’ का मंचन हुआ। शैली श्रीवास्तव ने इस नाटक का निर्देशन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अवध एकेडमी के प्रबंधक अरविंद कुमार यादव ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। प्राचार्य रूचि यादव ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और कलाकारों को प्रेरित किया।
नाटक की कहानी 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी एक शरणार्थी शिविर में रहने वाले मास्टर संतराम की है, जो अपनी बहन लाडली की प्रतीक्षा करते हैं। अश्वनी ‘मक्खन’ ने मास्टर संतराम और अनीता वर्मा ने लाडली की भूमिका निभाई।
प्रणय त्रिपाठी ने कैप्टन की भूमिका में लाडली को खोजकर लाते हैं। अनुपम बिसारिया ने गुमनाम का किरदार निभाया, जो अपनी यादों से पलायन करता है। प्रणव श्रीवास्तव और सुमित श्रीवास्तव ने क्रमशः भारतीय और पाकिस्तानी सिपाही की भूमिका निभाई।
नाटक का करुण अंत तब होता है जब मास्टर और लाडली दोनों सीमा पर तैनात सिपाहियों की गोलियों का शिकार हो जाते हैं। गुमनाम की अंतिम पंक्ति – “देश के नेताओं ने नहीं, अपनों को खोने वाले शरणार्थी ही असली मसीहा हैं” – दर्शकों को विचलित कर देती है।
शैली श्रीवास्तव के निर्देशन में यह नाटक विभाजन की त्रासदी को मार्मिक रूप से प्रस्तुत करता है। नाटक ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।




