इनके पास से 23 एटीएम कार्ड, 13 पासबुक, नौ चेकबुक व पांच मोबाइल फोन बरामद
ए अहमद सौदागर लखनऊ। साइबर वज्र अभियान के तहत इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने गुरुवार को एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है जो भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल कर उन्हें नौकरी दिलाने के नाम ठगी करते थे। पुलिस ने एक महिला सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से 23 एटीएम कार्ड, 13 पासबुक, नौ चेकबुक व पांच मोबाइल फोन बरामद किया है।
इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह के मुताबिक उपनिरीक्षक इंद्रपाल सिंह की तहरीर पर हजरतगंज कोतवाली में एक महिला सहित तीन लोगों के खिलाफ जालसाजी की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
उन्होंने बताया कि जांच पड़ताल के बाद पता चला कि गिरोह महिलाओं को मोहरा बनाकर अपने आसपास के शहरों और गांवों के लोगों को गुमराह कर उन्हें नौकरी दिलाने के नाम उनके नाम से अलग-अलग बैंकों में खाता खुलवाकर उनसे चेकबुक, पासबुक व एटीएम कार्ड के अलावा नेट बैंकिग की यूजर आईडी पासवर्ड, सिमकार्ड व बैंक खातों की क्रेडेशियल का एक्सिस लेकर उनके खातों की डिटेल हासिल कर साइबर ठगी करते थे। इस गिरोह का राजफाश कर साइबर सेल और इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह की संयुक्त टीम ने गुरुवार को एक महिला सहित तीन जालसाजों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है। पुलिस के मुताबिक पकड़े गए दोनों आरोपितों ने पूछताछ में अपना नाम जनपद बदायूं व हाल पता सेक्टर छह वृन्दावन पीजीआई निवासी वरुन कांत शर्मा जनपद फर्रूखाबाद व हाल पता पारा निवासी प्रेम कुमार उर्फ विमल बताया।
इस गिरोह में शामिल महिला शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में जाकर भोले-भाले लोगों को गुमराह कर नौकरी दिलाने का झांसा देकर उन्हें इस गोरखधंधे में शामिल करती थी। इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह के मुताबिक पकड़े गए आरोपी प्रेम कुमार उर्फ विमल ने पूछताछ में बताया कि वह अमित और दिनेश के बताए हुए शहर व गांवों के लोगों को गुमराह कर उनसे अलग-अलग बैंकों का खाता खुलवाकर गिरोह में शामिल अत्याधुनिक उपकरणों के सहारे कन्वर्ट कर कराकर चाईनीज लोगों को भेजता था। पकड़ा गया आरोपी वरुन कांत ने पुलिस को बताया कि प्रेम कुमार उसे नौकरी दिलाने के नाम पर बुलाया था, जबकि आरोपी महिला ने बताया कि उसे प्रेम कुमार ने नौकरी दिलाने के लिए बुलाया था, लेकिन साइबर अपराधियों ने उन्हें नौकरी दिलाने की अपराध के दलदल में धकेल दिया। बताया जा रहा है ग्राहक फंसाने के लिए गिरोह 40 से 45 प्रतिशत कमीशन देता था।





