न्यूज ऑफ इंडिया (एजेंसी) लखनऊ। लगातार हो रही भारी बारिश भी पुरानी पेंशन बहाली, TET की अनिवार्यता समाप्त करने और निजीकरण के विरोध में जुटे शिक्षक-कर्मचारियों के हौसले को नहीं डिगा सकी। शुक्रवार को लखनऊ के इको गार्डन में आयोजित अटेवा की महारैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी पहुंचे। बारिश के बावजूद मैदान में भीड़ लगातार बढ़ती गई और देखते ही देखते इको गार्डन खचाखच भर गया।
अटेवा के अनुसार, महारैली में प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचे पेंशनविहीन शिक्षक-कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, NPS और निजीकरण के विरोध तथा TET की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। महारैली में जगह-जगह ‘पुरानी पेंशन बहाल करो’, ‘TET अनिवार्यता समाप्त करो’ और ‘निजीकरण बंद करो’ जैसे नारे सुनाई दिए।
राष्ट्रीय आंदोलन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ के आह्वान पर आयोजित इस महारैली में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से शिक्षक-कर्मचारी पहुंचे। बारिश के बीच बड़ी संख्या में OPS लिखे छाते भी नजर आए। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, तराई, पश्चिमांचल समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने अपने-अपने अंदाज में आंदोलन को समर्थन दिया। महिला शिक्षकों और कर्मचारियों की भी बड़ी भागीदारी रही।
महारैली को संबोधित करते हुए NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ ने कहा कि TET की अनिवार्यता, NPS और निजीकरण को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार महारैली में उमड़े शिक्षकों और कर्मचारियों के आक्रोश को नहीं समझती है तो तीन माह बाद ‘डेरा डालो-घेरा डालो’ आंदोलन के तहत लखनऊ में क्रमिक अनशन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। उनके मुताबिक निजीकरण ने बेरोजगारी को बढ़ाया है और अटेवा शिक्षकों एवं कर्मचारियों की आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा।
प्रदेश उपाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार राय, चंद्रहास सिंह और डॉ. आशाराम ने कहा कि NPS और निजीकरण देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक हैं तथा ऐसी व्यवस्था से पूंजीपतियों को लाभ पहुंचता है। अटेवा नेताओं ने कहा कि संगठन निजीकरण का लगातार विरोध करता रहेगा।
स्वास्थ्य महासंघ के महामंत्री अशोक कुमार ने आगामी विधान परिषद चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विजय कुमार ‘बन्धु’ का स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी बनना शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि विजय बन्धु को सदन में भेजने से शिक्षक-कर्मचारियों के मुद्दों को मजबूती मिल सकती है।
पीडब्ल्यूडी वर्कचार्ज कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भारत सिंह ने कहा कि अटेवा ने पुरानी पेंशन के मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने का काम किया है। उनके अनुसार विजय बन्धु के संघर्ष के बाद देश के कई राज्यों में पुरानी पेंशन बहाल हुई है।
वरिष्ठ कर्मचारी नेता रामराज दूबे और रामेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि अटेवा के आंदोलन के बाद सरकार ने NPS में कई संशोधन किए और विज्ञापन के आधार पर शिक्षक-कर्मचारियों के एक बड़े समूह को पुरानी पेंशन का लाभ मिला।
रेलवे के वरिष्ठ नेता कमल उसरी ने निजीकरण के विरोध को लेकर अटेवा के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध से देश के बेरोजगार युवाओं के मुद्दे को आवाज मिली है।
अटेवा की प्रदेश महिला मोर्चा प्रभारी रंजना सिंह ने कहा कि महिला शिक्षक और कर्मचारी अटेवा के प्रत्येक संघर्ष में साथ हैं। वहीं आईटी सेल और सोशल मीडिया से जुड़े पदाधिकारियों अभिनव सिंह राजपूत, दानिश इमरान, आर्यनवेद, वीरेंद्र कुमार और कुलदीप सैनी ने कहा कि सोशल मीडिया और तकनीक के माध्यम से अटेवा के मुद्दों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश महेंद्र कुमार यादव ने भी अटेवा के आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।
महारैली में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रभारी धर्मेंद्र गोयन और सुमन कुरील ने पेंशन गीत प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम स्थल पर आंदोलनकारी माहौल और अधिक उत्साहपूर्ण हो गया।
महारैली का संचालन अटेवा के प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरज पति त्रिपाठी, प्रदेश मंत्री विजय प्रताप बूढ़नपुरी और प्रदेश संयुक्त मंत्री जनार्दन शुक्ल ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान विभिन्न शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अटेवा की मांगों के समर्थन में साथ खड़े रहने की बात कही।
महारैली के समापन पर डीसीपी की ओर से ज्ञापन लिया गया। संगठन के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल की अगले दिन मुख्य सचिव से वार्ता कराने तथा एक सप्ताह के भीतर मुख्यमंत्री से वार्ता कराने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद महारैली का समापन हुआ।
महारैली में मध्य प्रदेश से परमानंद डहेरिया, दिल्ली से मंजीत राणा, हरियाणा से विजेंद्र धारीवाल, पंजाब से सुखजीत सिंह तथा रेलवे से अखिलेश पाण्डेय सहित विभिन्न शिक्षक-कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें विक्रमादित्य मौर्य, ओम प्रकाश कन्नौजिया, नरेंद्र कुमार, संदीप वर्मा, राजेश जायसवाल, अशोक कन्नौजिया, डॉ. भूरी सिंह, अखिलेश यादव, राकेश रमन, संजय उपाध्याय, रजत प्रकाश, राधा प्यारी रावत, वीरेंद्र पटेल, राघवेंद्र सिंह और राकेश कुमार वर्मा समेत अन्य लोग शामिल रहे।





