हर फन में माहिर खाकी, अवैध वसूली, अपहरण, दुष्कर्म व हत्या जैसी संगीन अपराधों में लिप्त होकर पुलिस महकमे को कर रहे शर्मिन्दा
गोरखपुर जिले में सिपाही के हाथों मासूम बच्ची की हुई हत्या ने एक बार फिर पुराने जख्मों को किया ताजा
नियम-कानून की बलि चढ़ाने से बाज नहीं आ रहे दागी पुलिसकर्मी
मासूमों को भी नहीं बख्शते हत्यारे
ए अहमद सौदागर लखनऊ। महिलाओं, लड़कियों और बुजुर्गों के लिए मददगार बनने तथा उनकी सुरक्षा को लेकर पुलिसकर्मियों को एक बड़ी जिम्मेदारी होती है, जिन खाकी वर्दी वालों के कंधों पर लोगों की सुरक्षा का जिम्मा हो। यूपी पुलिस का एक उजला पहलू है जो हाल के दिनों में उभरा है। अब तस्वीर का दूसरा पहलू देखिए।
अवैध वसूली से लेकर अपहरण, दुष्कर्म, हत्या से लेकर अपराधियों को संरक्षण सहित अन्य संगीन आरोप इनसे अछूते नहीं हैं।
गौर करें तो इस वर्ष जुलाई माह में गोरखपुर जिले में सिपाही अभिषेक यादव बालिका को बहाने से अगवा कर उसे मार डाला, जबकि इसी जिले में एक शख्स अपहरण कर फिरौती मांगने के इरादे से मासूम छात्र वैभव को मौत के घाट उतार दिया।
यह घटना खुद ब खुद यह तथ्य बयान करता है कि खाकी की गिरती प्रतिष्ठा के लिए जिम्मेदार खुद पुलिसकर्मी हैं।
गोरखपुर जिले में अस्पताल में भर्ती बहन को खाना देकर वापस घर लौट रही दस साल की बालिका को डायल 112 में तैनात सिपाही अभिषेक यादव उसे घर छोड़ने की बात कहकर अगवा कर लिया। उस मासूम बच्ची को नहीं मालूम था कि जिस वर्दीधारी की मोटरसाइकिल पर बैठकर घर की दहलीज पर जा रही है वही वर्दीधारी उसके के लिए दुश्मन बन जाएगा। यही हुआ बेखौफ अभिषेक यादव अपने अफसरों का फरमान ताक पर रखकर मासूम की इज्जत पर डाका डाल उसे मौत की नींद सुलाने के बाद शव को नदी में फेंक दिया।
दरअसल दागी पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए घिनौने कृत्य का यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले कई दागी पुलिसकर्मी वर्दी के दामन पर दाग लगा चुके हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी सिपाही अभिषेक यादव इससे पहले भी कई घटनाओं को अंजाम देकर पुलिस महकमे की किरकिरी कर चुका है, इसके बावजूद भी पुलिस के आलाधिकारी उसकी नकामी पर पर्दा डालने से पीछे नहीं रहे, नतीजतन वही एक बार फिर घिनौनी घटना कर पुलिस महकमे को शर्मिन्दा कर दिया।



