अभियान चलाकर भी पुलिस नहीं कस सकी नकेल
आशियाना क्षेत्र में हुई घटना के बाद उठे सवाल, कागजों में बहू बेटियों की सुरक्षा
ए अहमद सौदागर लखनऊ। मंगलवार देर शाम बेमौसम बारिश के साथ तेज रफ्तार चल रही हवा। इसी बीच घर जा रही एक नाबालिग बालिका बारिश से बचने के लिए एक निर्माणाधीन मकान में बैठ गई, लेकिन उसे नहीं मालूम था कि जिस जगह गई वहां दरिंदे भेड़ियों का झुंड बैठा है।
बारिश धीमी होते ही वह घर के लिए निर्माणाधीन मकान से कदम निकालना चाहा कि दरिंदे भेड़ियों का झुंड ने उसे दबोच लिया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वह चीख-पुकार करती रही, लेकिन बेखौफ वहशियों को तनिक भी दया नहीं आई और उसकी आबरू लू डाला।
आशियाना क्षेत्र में हुई वारदात ने राजधानी में तेजी से बढ़ रहे नशेड़ियों के अड्डों के सवाल को भी खड़ा किया है। शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में इससे पहले भी कई मासूम व लड़कियां नशेड़ियों की हवस का शिकार हो चुकी हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि घनी आबादी से लेकर सुनसान स्थानों तक में नशेड़ियों के अड्डे हैं।
शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में कुछ ऐसे स्थान हैं, जहां नशेड़ियों और जुआरियों का अड्डा बन चुका है और इनकी संदिग्ध गतिविधियों की आहट सुनने के बाद भी स्थानीय पुलिस अनजान बनी रहती है, नतीजतन यही नशेड़ी तथा जुआरी राह चलती महिलाओं एवं लड़कियों को अपना निशाना बनाकर पुलिस को खुली चुनौती दे रहे हैं। बीते कुछ साल पहले हुई घटनाओं के बाद लखनऊ पुलिस ने अभियान चलाया, लेकिन कड़वा सच यह है कि कुछ दिनों बाद ही पुलिस का अभियान फाइलों में दफन हो कर रह गई। मंगलवार देर शाम आशियाना क्षेत्र में हुई घटना ने एक बार फिर पुराने जख्मों को ताजा कर दिया।
गौर करें तो इससे पहले 15 फरवरी 2016 को जानकीपुरम क्षेत्र निवासी 12वीं की छात्रा को अगवा कर नशेड़ियों ने गैंगरेप के बाद मौत की नींद सुला दिया। उसका शव हाईसिक्योरिटी जोन सीएम आवास से चंद कदमों की दूरी पर नाले किनारे जंगल में पड़ा था।
यही नहीं वर्ष 2014 में मोहनलालगंज क्षेत्र के बलसिंह खेड़ा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में एक महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। यह तो महज बानगी भर है और भी कई महिलाएं एवं लड़कियां वहशियों का शिकार बन चुकी हैं।





