रहीमाबाद लखनऊ। (संवाददाता) राजधानी के मलिहाबाद तहसील के अंतर्गत आने वाला रहीमाबाद चौराहा इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। नगर पंचायत और स्थानीय प्रशासन की घोर अनदेखी के कारण मुख्य मार्ग के किनारे कूड़े का एक विशाल पहाड़ खड़ा हो गया है। इस गंदगी से उठने वाली भीषण दुर्गंध ने न केवल स्थानीय निवासियों का जीना दूभर कर दिया है, बल्कि यहाँ से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी यह बड़ी मुसीबत बन गया है।
क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि सड़क किनारे जमा हो रहे इस कचरे के कारण पूरा इलाका संक्रामक बीमारियों की मुहाने पर खड़ा है। ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए मुख्य समस्याओं को रेखांकित किया:
बढ़ता संक्रमण: गंदगी के ढेर पर पनप रहे मच्छरों और मक्खियों के कारण इलाके में मलेरिया, डेंगू और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।राहगीरों की फजीहत: चौराहे से गुजरने वाले लोग दुर्गंध से बचने के लिए मुंह पर रुमाल रखकर निकलने को मजबूर हैं।
हवा और आवारा पशुओं के कारण अक्सर कूड़ा मुख्य सड़क पर फैल जाता है, जिससे दोपहिया वाहनों के फिसलने और सड़क दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है।
“हमने प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। बारिश के मौसम में यह सड़ांध इतनी बढ़ जाती है कि घरों के भीतर बैठना भी मुहाल हो जाता है।”— एक स्थानीय निवासी
स्थानीय जनता में प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर रहीमाबाद जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
चेतावनी: ग्रामीणों और स्थानीय दुकानदारों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही कूड़े के इस ढेर को हटाकर इसके स्थायी निस्तारण की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।





