बस्ती को बारूद के ढेर पर बिठाया था सरकारी अमले ने
गैस कनेक्शन हो या बिजली कनेक्शन लेने के लिए लोगों को झेलने पड़ते हैं पापड़
सरकारी जमीन पर बनी झोपड़ी वालों को बांट दिया था गैस व बिजली कनेक्शन
इससे जिम्मेदार अफसरों की नीयत शक के दायरे में
ए अहमद सौदागर लखनऊ। संबंधित विभाग में तैनात ओहदेदारों की नीयत एक बार फिर शक के दायरे में है। वजह कि विकासनगर अग्निकांड को लेकर चल रही जांच में यह बात सामने आई है कि रिंग रोड पर सड़क किनारे जिस बेशकीमती जमीन पर सैकड़ों झोपड़ियां बनीं थीं वह लोकनिर्माण विभाग की जमीन है। इसकी सच्चाई उजागर तब हुई जब बुधवार को शाम पांच बजे झोपड़ियां जलकर राख हो गई और इसकी चपेट में आकर दो मासूम बहनों की झुलसकर मौत हो गई थी।
सवाल है कि गैस सिलेंडर का या फिर बिजली कनेक्शन लेने के लिए मानक तय है कि सभी कागजात पूरे होंगे तभी कनेक्शन मिलेंगे। इसके लिए घर की रजिस्ट्री सहित कई दस्तावेज लेकर उपभोक्ता दौड़ते रहते हैं, इसके बावजूद भी महीनों के दिन गुजर जाया करते हैं। सरकारी जमीन पर बनी सैकड़ों झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को बकाएदा उनके नाम गैस सिलेंडर कनेक्शन और बिजली कनेक्शन था। सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इन लोगों को कनेक्शन कैसे मिल गए? क्या संबंधित विभाग नींद में सो रहा था?
इसी लापरवाही का नतीजा रहा कि सालों से सरकारी जमीन पर सैकड़ों लोग झुग्गी-झोपड़ियां बनाकर रहते थे और संबंधित विभाग बेखबर रहा। नतीजतन बुधवार को अचानक आग लगने से झोपड़ियों में आग लग गई और देखते ही देखते राख में तब्दील हो गई, जबकि इसकी चपेट में आकर दो मासूम बहनों की झुलसकर मौत हो गई। अब वही अमला अपनी सफाई पेश करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। खास बात यह है कि इस मामले में जरा भी खाकी वर्दी वालों की भूमिका होती तो शायद अबतक न जाने कितने पुलिसकर्मियों पर गाज गिर जा चुकी होती?




