June 6, 2026 11:23 am

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे: टोल कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, वेतन वृद्धि और साप्ताहिक अवकाश को लेकर उठाई आवाज

30 दिन लगातार काम और सिर्फ ₹11,700 वेतन’— महंगाई के दौर में टोल कलेक्टर्स ने सरकार से लगाई न्यूनतम मजदूरी लागू करने की गुहार

 

9औरास उन्नाव। (संवाददाता) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के विभिन्न टोल प्लाजाओं पर चौबीसों घंटे सेवाएं देने वाले टोल कलेक्टर (टी.सी.) कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। कम वेतन और लगातार काम के बोझ से नाराज कर्मचारियों ने प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में उनसे बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया जा रहा है, लेकिन बदले में उचित पारिश्रमिक और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

महंगाई में ₹11,700 में कैसे चले परिवार?

टोल कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उन्हें वर्तमान में मात्र ₹11,700 मासिक वेतन दिया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि लगातार 30 दिनों तक ड्यूटी करने के बाद भी उन्हें न तो कोई साप्ताहिक अवकाश (वीकली ऑफ) मिलता है और न ही त्योहारों पर कोई छुट्टी दी जाती है। कर्मचारियों के अनुसार, इतनी कम रकम में इस दौर में पूरे परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च उठाना पूरी तरह असंभव हो गया है।

सरकार के नियम को ताक पर रखने का आरोप

कर्मचारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम मजदूरी ₹18,000 निर्धारित की जा चुकी है। इसके बावजूद टोल प्लाजाओं पर इस नियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और उन्हें उनके हक से वंचित रखा जा रहा है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें:

वेतन वृद्धि: मासिक वेतन को बढ़ाकर सरकार के नियमानुसार न्यूनतम ₹18,000 किया जाए। काम के घंटे: ड्यूटी का समय कड़ाई से 8 घंटे निर्धारित हो। साप्ताहिक अवकाश: महीने में कम से कम 4 साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य रूप से दिए जाएं।त्योहारों का भत्ता: त्योहारों पर छुट्टी मिले या फिर अतिरिक्त कार्य के एवज में उचित विशेष भुगतान सुनिश्चित हो।

शांतिपूर्ण आंदोलन और एकजुटता की अपील

अपनी मांगों को लेकर एकजुट हुए कर्मचारियों ने एक्सप्रेसवे के सभी टोल प्लाजा पर कार्यरत साथियों से एक साथ आने का आह्वान किया है। उन्होंने साफ कहा कि वे अपनी मांगों को पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाएंगे। कर्मचारियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब उनके हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए वे अपना हक लेकर रहेंगे।

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