November 7, 2026 10:56 pm

रहीमाबाद में किसानों का हल्लाबोल: 19 सूत्रीय मांग पत्र के साथ धरना शुरू, पुलिस के 1 माह में निस्तारण के वादे पर स्थगित

मलिहाबाद, लखनऊ। (संवाददाता) रहीमाबाद थाना क्षेत्र स्थित राजकीय ऊसर सुधार बीज प्रक्षेत्र कृषि फार्म कार्यालय परिसर में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार को भारतीय किसान मजदूर यूनियन (सर्व समाज) के प्रदेश अध्यक्ष सुशील सिंह चौहान के नेतृत्व में किसान 19 सूत्रीय मांग पत्र लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। किसान नेताओं ने लाउडस्पीकर लगाकर फार्म प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

धरने की सूचना मिलते ही रहीमाबाद थाना प्रभारी अरुण कुमार त्रिगुनायक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों की सभी समस्याओं को सुना और यूनियन के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को निष्पक्ष जांच व समस्याओं के निदान का भरोसा दिया। थाना प्रभारी द्वारा एक माह का समय मांगे जाने और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई का निर्देश देने के बाद किसानों ने अपना ज्ञापन सौंपकर धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।

ज्ञापन में उठाए गए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मुख्य बिंदु:

करोड़ों का फर्जीवाड़ा व बिल-वाउचर: 4 मार्च 2025 से 1 जून 2025 के बीच प्राप्त सामग्री में करीब 2.50 करोड़ (2 करोड़ 50 लाख) रुपये के फर्जी बिल-वाउचर, डीजल खपत और बस/टंकी खर्च में भारी वित्तीय अनियमितता का आरोप।

लंबे समय से जमे कर्मचारी और अवैध कब्जे: वरिष्ठ सहायक अखिलेश यादव पर पिछले 14 वर्षों से एक ही जगह तैनात रहने और गोदनामा/स्थानांतरण नीति की जांच की मांग। वहीं वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त रामाश्रय यादव पर सरकारी आवास पर अवैध कब्जे, 2 एकड़ भूमि पर खेती, बिजली और संसाधनों के व्यावसायिक दुरुपयोग की रिकवरी प्रबंधकों के वेतन से करने की मांग।

फर्जी कोटेशन व बिना काम भुगतान: आरोप है कि बाहरी व्यक्तियों, पूर्व प्रधानों के परिजनों और अधिकारियों के करीबियों के नाम पर बिना कार्य कराए फर्जी कोटेशन और बेनेफिशरी बनाकर सरकारी धन का गबन किया गया।

एक ही जेसीबी का दोहरा भुगतान: वाहन संख्या UP32FN1518 (जेसीबी) का रहीमाबाद और कासिमाबाद प्रक्षेत्र से अलग-अलग तिथियों व अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर भुगतान दिखाया गया, जबकि आरटीओ रिकॉर्ड में मालिक का नाम अलग दर्ज है।

जिप्सम घोटाला व रास्ते से बिक्री: राहटा खंड पर 1,000 बोरी जिप्सम सड़ने और मांझ गांव खंड पर जिप्सम की बोरियां पहुंचे बिना रास्ते में बेचे जाने का आरोप लगाते हुए संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की गई।

थाना प्रभारी के हस्तक्षेप और एक महीने के भीतर पारदर्शी जांच व रिकवरी का लिखित-मौखिक आश्वासन मिलने के बाद यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

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