August 8, 2026 2:12 am

अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का राजफाश, चार ठग गिरफ्तार

चेक बुक व एटीएम कार्ड सहित अन्य जालसाजी के उपकरण बरामद

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों गिरोह का राजफाश कर चार हाईटेक जालसाजों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को इनके पास भारी मात्रा में चेक बुक व एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं।

पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर कॉरपोरेट धोखाधड़ी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। अपर पुलिस उपायुक्त (दक्षिणी) रल्लापल्ली वसंत कुमार ने बताया कि वित्तीय लेनदेन से जुड़े सुरागों की जांच के बाद संयुक्त टीम ने गिरोह के चार सदस्यों सत्येन्द्र सविता, निप्पु कुमार, मनीष कुमार और सन्नी कुमार को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि पुलिस उनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।

पुलिस के मुताबिक आरोपियों के पास से 79 चेक बुक, 77 एटीएम कार्ड, छह पॉइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) मशीनें, 14 कीपैड मोबाइल फोन, 15 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 29 सिम कार्ड, तीन लैपटॉप, विभिन्न कंपनियों से जुड़े दस्तावेज, तीन पहचान पत्र और छह रबर स्टांप बरामद किए गए हैं। अधिकारी के अनुसार, आरोपी लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर चालू खाते खुलवाते थे और फर्जी कार्यालयों की आड़ में फर्मों का पंजीकरण कराते थे।

उन्होंने बताया कि इसके बाद उनके साथी साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि इन खातों में अंतरित करते थे और बाद में इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल, एटीएम कार्ड, चेक बुक, सिम कार्ड और ओटीपी का इस्तेमाल किया जाता था। कुमार ने बताया कि गिरोह का एक अन्य सदस्य फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि फरार आरोपी को ही गिरोह का सरगना माना जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में राज्य और राष्ट्रीय सीमाओं से परे फैले एक संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं तथा संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भी जांच की जा रही है।

ऐसे ठगी करते थे साइबर अपराधी 

पुलिस जांच पड़ताल में खुलासा हुआ कि गिरोह पहले लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर चालू बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद फर्जी कार्यालयों के पते पर कंपनियों का पंजीकरण कराया जाता था। साइबर ठगी से हासिल रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर की जाती थी। आरोपी इंटरनेट बैंकिंग की लॉगिन जानकारी, एटीएम कार्ड, चेक बुक, सिम कार्ड और ओटीपी का इस्तेमाल कर धनराशि निकाल लेते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला होने के साथ इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भी जांच की जा रही है।

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