मुन्ना बजरंगी के साले पुष्प जीत सिंह और उसके साथी संजय मिश्र हत्याकांड: अभी तक नहीं सुलझा सकी विकासनगर पुलिस
ए अहमद सौदागर लखनऊ। कभी पुलिस का खौफ बताने के लिए कहा जाता था। पुलिस के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराधियों की गर्दन तक पहुंच ही जाते हैं। अब बीते दौर की बात होती जा रही है। बीते दस पहले दो लोगों के सीने में गोलियों की बौछार कर बदमाशों ने पुलिस को चुनौती दी। घटना के बाद पुलिस के आलाधिकारी और उनके अधीनस्थ हिले डुले। अफसरों ने जल्द कातिलों को सलाखों के पीछे हों, लेकिन पुलिस अब तक अंधेरे में ही तीर मार रही है या फिर चुप बैठ गई है।
इनमें कुछ ऐसे मामले, हैं, जिनमें असलहों से लैस बेखौफ बदमाशों ने जमकर गोलियों की बौछार की और सरे शाम दो लोगों को मौत की नींद सुलाने के बाद भाग निकले।
सनद रहे कि विकासनगर क्षेत्र में पांच मार्च 2016 की देर शाम माफिया मुन्ना बजरंगी के साले पुष्प जीत सिंह और उसके साथी संजय मिश्र के सीने में बदमाशों ने उस समय गोलियां बरसाई जब वह अपनी कार से घर जा रहे थे। डबल मर्डर की खबर मिलते ही पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन की तो मौके से नाइन एमएम के कारतूस खोखा बरामद हुआ। पुलिस की टीमें हत्यारों की तलाश में आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर चेकिंग अभियान चलाने का दावा किया, लेकिन तब तक कातिल मौके से भाग चुके थे।
इस मामले की जानकारी मिलते ही बागपत जेल में बंद माफिया मुन्ना बजरंगी भी आए और पुलिस को चुनौती देते हुए दो टूक शब्दों में कहा था कि पुलिस हार मान रही है तो वह अपने स्तर से देख लेंगे। माफिया मुन्ना बजरंगी का अल्टिमेटम सुन पुलिस के आलाधिकारी भी सकते में आए कि कहीं यह घटना गैंगवॉर की शक्ल न ले ले। विकासनगर पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का राजफाश करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन दस साल का दिन गुजरने के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है।




