इससे पहले साइबर सेल और साइबर थाने की पुलिस 119 आरोपितों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है
इनके पास से एक आई पैड, दो मोबाइल फोन व पांच हजार रुपए की नकदी बरामद
ए अहमद सौदागर लखनऊ। विभूतिखंड क्षेत्र स्थित शहर की नामी-गिरामी समिट बिल्डिंग के 11वीं मंजिल पर संचालित अन्तर्राष्ट्रीय साइबर ठगी की दुकान खोलकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर फरार चल रहे पचीस हजार रुपए के इनामी सहित तीन जालसाजों साइबर सेल और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने मंगलवार को मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया है। इससे पहले पुलिस ने गोरखधंधे को अंजाम देने वाले ललित खैराजानी व विक्रम सिंह सहित 119 जालसाजों को पकड़कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है। इस गिरोह में शामिल 27 लड़कियां व 92 लड़के शामिल थे, जबकि अन्य आरोपी फरार हो गए थे।
पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बीते एक जुलाई 2026 को साइबर सेल और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर संचालित अन्तर्राष्ट्रीय कॉल सेंटर का राजफाश कर 119 जालसाजों को गिरफ्तार किया था। जबकि कई आरोपी मौके का फायदा उठाते हुए भाग निकले थे। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अफसरों ने पच्चीस हजार का इनाम घोषित कर रखा था।
इस गोरखधंधे में लिप्त अहमदाबाद गुजरात निवासी विनीत वशिष्ठ पुत्र धर्मेंद्र वशिष्ठ, कोलकाता निवासी नायकर जयराज पुत्र तमिल रासन व कोलकाता निवासी रिंकी दास पुत्री प्रदीप दास गुप्ता को साइबर सेल और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने मंगलवार को धरदबोचा। पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर यह एक संगठित गिरोह जो विभूतिखंड क्षेत्र के समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर फर्जी कॉल सेंटर चलाकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बना रहे थे। उन्होंने बताया कि इस गोरखधंधे को अंजाम इनामी मुख्य सरगना विनीत वशिष्ठ, विक्रम परमार व ललित खेराजानी द्वारा दिया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि इस मामले अन्य फरार चल रहे आरोपितों की तलाश में उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।




