किसी कुख्यात बदमाश का पुलिस मुठभेड़ में अंत हुआ तो कोई खुद के गिरोह का निशाना बना
ए अहमद सौदागर लखनऊ। अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले कुख्यात बदमाश के आतंक पर गौर करें तो तेरह साल पहले यानी 29 जनवरी वर्ष 2014 को गोमतीनगर क्षेत्र के विशाल खंड स्थित एक मकान में किराए पर रहने वाले प्रयागराज जिले के झूंसी थाने के हिस्ट्रीशीटर आशीष मिश्रा और सुल्तानपुर निवासी सिपाही के बेटे रोहित असलहों से लैस बदमाशों ने गोलियों से भून डाला। मामला पॉश कॉलोनी का होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा और आनन-फानन में पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की गहनता से छानबीन शुरू की।
दो-चार दिनों बाद पुलिस ने घटना का राजफाश किया तो पता चला कि इनकी हत्या गैंग छोड़ने के चक्कर में की गई थी।
कहते हैं कि अपराध की दुनिया में आने का रास्ता तो है लेकिन जाने का नहीं। यह तो हिस्ट्रीशीटर आशीष मिश्रा और उसके साथी रोहित हत्याकांड का मामला है।
बीते दिनों कुछ दिनों से यूपी के अलग-अलग जिलों में आतंक का पर्याय बने कई दुर्दांत अपराधी पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए या फिर एक-दूसरे की जंग उनका अंत हो गया।
वर्ष 2021 में विभूतिखंड क्षेत्र में पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की सरे शाम गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज मामले वाराणसी जिले के चोलापुर क्षेत्र स्थित लखनपुर निवासी कुख्यात बदमाश गिरधारी उर्फ डॉक्टर का नाम सामने आया तो पुलिस सकते में आ गई, लेकिन उसका भी पुलिस मुठभेड़ में गोमतीनगर किनारे अंत हुआ।
बताया जा रहा है कि फरवरी 2001 में वाराणसी से शुरू हुआ था खूंखार गिरधारी का आपराधिक सफर और लखनऊ आते-आते खत्म हुआ।
यह तो महज बानगी भर इससे पहले भी कई सूचीबद्ध अपराधी मुठभेड़ मारे गए और गोली लगने से लंगड़े लूले भी लेकिन इनके गिरोह के सदस्यों का आतंक आज भी जारी है जो थम नहीं रहा है। हालांकि योगी आदित्यनाथ की सरकार में एक-दो नहीं बल्कि तीन सौ से अधिक कुख्यात बदमाशों का सफाया हुआ और सैकड़ों की संख्या में गिरफ्तार होकर सूचीबद्ध बदमाश सलाखों के पीछे पहुंचे।
कहने का मतलब है कि इस अपराधी अपराध तो कर बैठता है और कुछ दिनों तक उसका बोलबाला भी रहता है, लेकिन जिस दिन वह पुलिस की नजर में चढ़ा तो मानो उसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई।
कुख्यात बदमाश गिरधारी उर्फ डॉक्टर ही नहीं लोगों का सरेराह व सरे शाम खून बहाने वाले बदमाशों को उसकी दबंगई की कीमत चुकानी पड़ी। सहारनपुर जिले में बिहार और पूर्वांचल के कुख्यात बदमाश लल्लन सिंह पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ।
मुजफ्फरनगर में अपहरण कर किशोरियों का यौन शोषण करने वाला दरिंदा सतपाल उर्फ सतू मुठभेड़ में ढेर हुआ।
मेरठ जिले में अधिवक्ता हत्या कांड के मामले में कुख्यात बदमाश सिराज अहमद व आजाद उर्फ जुबैर ढेर हुए।
अंबेडकरनगर जिले में मां चार बच्चों का हत्यारोपी मोहम्मद आमिर पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
फिरोजाबाद जिले में पुलिस अभिरक्षा से फरार लूट का सरगना नरेश मुठभेड़ में ढेर हुआ।
मुरादाबाद जिले में खूंखार किस्म के बदमाश आसिफ व दीनू ढेर हुए। आगरा के बालाजी ज्वैलर्स के मालिक योगेश चौधरी की दिनदहाड़े हत्या करने वाला कुख्यात बदमाश अमन मुठभेड़ में मारा गया।
27 जून 2026 को जौनपुर निवासी प्रापर्टी डीलर संदीप सिंह हत्याकांड के मामले में फरार चल रहे एक लाख रुपए के इनामी बदमाश संजीव कुमार उर्फ संजीव को यूपी एसटीएफ ने राजधानी लखनऊ के बीबीडी थाना क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया। यह तो महज बानगी भर है और भी कई आतंक का पर्याय बने कुख्यात बदमाश मुठभेड़ में ढेर हो चुके हैं, जबकि कईयो बदमाश लंगड़े लूले होकर सलाखों के पीछे जा चुके हैं।




