August 8, 2026 2:27 am

अब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी खतरे के मुहाने पर: पत्रकारों को निशाना बना रहे अपराधी 

खबर चलाना और लिखना भी बन रहा जान की आफत, पत्रकारों में रोष व्याप्त 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी भले ही तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर अपराधियों पर लगाम कसने के लिए जोर लगा रहे हों, लेकिन कड़वा सच यह है कि अपराधी आम आदमी तो दूर अब पत्रकारों को निशाना बना रहे हैं। मानक नगर निवासी वरिष्ठ पत्रकार सुशील अवस्थी पर हुए जानलेवा हमला एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है।

यूपी में अब एक दो नहीं बल्कि दर्जन से अधिक पत्रकारों की हत्या और जानलेवा हमले हो चुके हैं।

फिल्ड में घूम-घूमकर रिपोर्टिंग करते समय पत्रकारों की जान हमेशा खतरे में रही। कभी-कभार तो ऐसे हालात होते हैं कि भीड़ भी पत्रकारों पर कहर बनकर टूट पड़ती है लेकिन इसके बावजूद जान जोखिम में डालकर पत्रकार लोगों की समस्या लिखकर संबंधित विभागों तक पहुंचाते हैं। मानक नगर क्षेत्र में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुशील अवस्थी ने भी सच्चाई उजागर करने का प्रयास किया तो मानो उनके जान पर आफत आ गई। हमलावर उनके घर जाकर पहले सलामी ठोकी फिर बुलाया और घर से कुछ दूरी पर ले जाकर उनके ऊपर ताबड़तोड़ हमला बोल बुरी तरह से जख्मी कर दिया। यह तो महज बानगी भर है इससे पहले भी बेखौफ बदमाशों ने कईयो पत्रकारों को निशाना बना चुके हैं। किसी को सरेराह तो किसी को सरे आम मौत की नींद सुला दिया तो किसी के ऊपर जानलेवा हमला कर लहुलुहान कर दिया। अपराधियों ने जब चाहा और जहां चाहा पत्रकारों को निशाना बनाया और पुलिस के जिम्मेदार अफसर उनकी सुरक्षा किए जाने का डंका बजाते रहे। पत्रकार सुशील अवस्थी पर हुए हमले को लेकर राजधानी लखनऊ सहित यूपी के सभी पत्रकारों में रोष व्याप्त है।

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