जांच एजेंसियां करेंगी आरोपियों से गहन पूछताछ,हो सकते है कई और राजफाश
ए अहमद सौदागर लखनऊ। सूबे की राजधानी लखनऊ में गिरफ्तार संदिग्ध आतंकियों के मामले में जांच तेज हो गई है। यूपी एसटीएस को बड़ी सफलता तब मिली, जब कोर्ट ने चारों आरोपितों साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, लोकेश और विकास गहलावत को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।यह रिमांड तीस अप्रैल से शुरू हो गई है। रिमांड के दौरान जांच एसेंजी इन आरोपी से गहन पूछताछ करेगी, जिस दौरान कई और खुलासे से हो सकते हैं।एटीएस के मुताबिक, इन आरोपियों पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर लखनऊ समेत राज्य के कई हिस्सों में आगजनी, रेलवे सिग्नल सिस्टम को नुकसान पहुंचाने और दहशत फैलाने की साजिश रचने का आरोप है।जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मेरठ निवासी साकिब सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में था. उसने अरबाब मेरठ, विकास गहलावत उर्फ रौनक गौतमबुद्ध नगर और लोकेश उर्फ पपला पंडित गौतमबुद्ध नगर को भी इस नेटवर्क में शामिल किया था।सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की रेकी की थी और संवेदनशील जगहों की जीपीएस लोकेशन पाकिस्तान भेजी थी।
ये भी दावा किया गया है कि पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर ने आगजनी के लिए प्रति घटना 12 हजार रुपए देने का वादा किया था। गिरफ्तारी ठीक उसी समय हुई, जब वह अपनी साजिश को अंजाम देने की तैयारी में थे। वहीं दूसरी ओर नोएडा में 23 अप्रैल को पकड़े गए दो अन्य संदिग्ध तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला खान और समीर खान के मामले में भी जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। इन पर कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए लोगों को जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।एटीएस को इनके मोबाइल से कई ऑडियो रिकॉर्डिंग्स मिली हैं, जिनमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के एजेंट भी शामिल थे।आरोपियों ने इन कॉल्स के दौरान मौत की धमकियां दीं और पाकिस्तानी हैंडलर्स को भी जोड़ा। एटीएस अब इन दोनों के जरिए तैयार की जा रही स्लीपर सेल के 20 से ज्यादा युवकों की तलाश में जुटी है।इनकी पहचान के लिए एटीएस ने अदालत में रिमांड की अर्जी दी है, जिस पर एक मई को सुनवाई होनी है। गिरफ्तारी के दौरान एक 32 बोर की पिस्तौल और पांच जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं।एटीएस की टीम दोनों मामलों में फंडिंग, रिक्रूटमेंट, सोशल मीडिया के जरिए रेडिकलाइजेशन और क्रॉस-बॉर्डर कनेक्शन की गहन जांच कर रही है। एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक मॉड्यूल्स युवाओं को भड़काकर और छोटी-छोटी घटनाओं से दहशत फैलाकर बड़े स्तर पर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश में थे।एडीजी कानून व्यवस्था ने इन गिरफ्तारियों को राज्य की सुरक्षा के लिए बड़ी कामयाबी बताया है।कथित तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े लोगों की बातचीत सामने आई है।जाँच एजेंसिया उसी को आधार बनाकर अपनी पड़ताल में जुटी हुईं है।




