रामू गौतम
मलिहाबाद लखनऊ। राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद विकासखंड क्षेत्र में इस समय माह अप्रैल महीना चल रहा जो तो आगे का तापमान बढ़ रहा है। धीरे-धीरे गर्मी अपनी चरम सीमा पर पहुंच रही है पानी के पारंपरिक ठिकाने की सुध लेने वाला कोई नहीं है। प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करके ग्रामीणों की सुविधा के लिए आदर्श जलाशय तो बनवाए गए लेकिन वे भी बदहाल व सूखे पड़े हैं। मनरेगा के अंतर्गत बनवाए गए क्षेत्र में तालाब जिनमें आधे से भी ज्यादा सूखे पड़े हैं उनमें झाड़ियां उग आई है। जानवरों ने जलाशयों को चरागाह बना लिया है।
मनरेगा के तहत आदर्श जलाशय का निर्माण केंद्र सरकार द्वारा जल संचयन भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने तथा मजदूरों को रोजगार देने के लिए की गई थी। आदर्श जलाशय का निर्माण एक दशक पूर्व करवाया गया था इसका उद्देश्य था बारिश में गांव का पानी बहकर तालाबों में पहुंचे जिसका इस्तेमाल पशु पक्षी जानवरों व सिंचाई के लिए किया जाए। इन तालाबों पर करोड़ों खर्च किया गया लेकिन कोई भी सही हालत में नहीं है और तो यह जलाशय कूड़ाघर बन चुके है। कुछ जलाशयों का जीर्णोद्धार अभी हाल ही में हुए हैं वे सही तो है पर उनमे पानी पूरी तरह से सूख चुका है।




