गैरों से ज्यादा अपनों से डर, सौतेला व्यवहार बन जाता है काल
ए अहमद सौदागर लखनऊ। कोमल शरीर, अपरिपक्व मस्तिष्क और तोतली जुबान यानी मासूम बच्चे। आपराधिक मानसिकता के लोगों के लिए सॉफ्ट टारगेट होते हैं। पहली पत्नी के बच्चों के लिए इनके साथ बेरहमी जैसे व्यवहार मानो उनके लिए घातक साबित होता है। कुछ दिनों तक बाद मासूमों के लिए सौतेली मां या फिर खुद के माता-पिता अपने ही कोख में पले बच्चों के लिए दुश्मन बन जाते हैं। सवाल है कि मां दूसरी होती है, लेकिन पिता सगा होता है इसके बावजूद वह अपने ही लाडले के लिए खतरा बन जाता है।
चौक में चार वर्षीय कर्नव हत्याकांड व सीतापुर जिले के हुसैनगंज निवासी दुधमुंहे बच्चे के हत्याकांड का मामला। दोनों घटनाओं ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। इससे पहले भी मासूमों को निशाना बनाया जा चुका है।
खास बात यह है किसी दूसरे की चाहत में हुई अनबन होने पर बच्चे का जीवित रहना या मिलना मुश्किल होता है।
घटना 13 मार्च 2026 की है। राजधानी लखनऊ के चौक के लाजपत नगर में चार वर्षीय मासूम बच्चे कर्नव को किसी पेशेवर अपराधी नहीं बल्कि उसी के पिता भीष्म खरबंदा और सौतेली मां रागिनी खरबंदा ने पहले उस कोमल शरीर पर तरह-तरह की यातनाएं दी फिर पीट-पीटकर मौत की नींद सुला दिया। इतनी छोटी शरीर पर 15 से अधिक घाव के निशान मिले थे। मासूम बच्चे की हड्डी टुटने से मौत होने की पुष्टि हुई।
वहीं 14 मार्च 2026- सीतापुर जिले के हुसैनगंज निवासी दंपति विपिन कुमार और पत्नी वंदना के बीच किसी बात को लेकर चल रही अनबन दुधमुंहे बच्चे के लिए काल बन गई। वंदना छह माह की बेटी को गोद में लेकर घर से निकली और बेटी को नहर में फेंक दिया। इन दोनों घटनाओं ने मानों हर किसी को हिलाकर रख दिया। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा, लेकिन मासूमों की जान नहीं बचाई जा सकी।




