रामू गौतम
मलिहाबाद लखनऊ। राजधानी लखनऊ के फल पट्टी छेत्र मलिहाबाद में इस बार आम के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिये सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगों का उचित समय प्रबन्धन नितान्त आवश्यक है, क्योंकि बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था अत्यन्त ही संवेदनशील होती है। वर्तमान में आम की फसल को मुख्य रूप से भुनगा, कैटरपिलर(कटर कीट),ब्लैक इंच वार्म एवं मिज कीट तथा झुलसा और एन्थ्रेकनोज रोग से क्षति की सम्भावना रहती है। आम के बागों में भुनगा कीट पत्तियों एवं छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहुँचाते हैं प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है साथ ही यह कीट मधु की तरह का पदार्थ भी विसर्जित करता है, जिससे पत्तियों पर काले रंग की फफूँद जम जाती है, फलस्वरूप पत्तियों द्वारा हो रही प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मंद पड़ जाती है।
इसी प्रकार आम के बौर में लगने वाला मिज कीट मंजरियों एवं तुरन्त बने फलों तथा बाद में मुलायम कोपलों में अण्डे देती है, जिसकी सूँडी अन्दर ही खाकर क्षति पहुँचाती है, प्रभावित भाग काला पड़कर सूख जाता है। भुनगा एवं मिज कीट के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 2 मि०ली० प्रति ली० पानी के साथ या थायोमेथेक्जाम 2 ग्रा० प्रति ली० पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें। आम की फसल में लगने वाला कैटरपिलर(फली छेदक कीट),ब्लैक इन्चवार्म (कटर कीट) आम के बौर तथा छोटे फलों को कुतर कर खा जाता है तथा फल डंठल सहित जमीन पर गिर जाते हैं जिससे आम बागवानों/कृषकों को नुकसान पहुँचता है। इस कीट/कैटरपिलर के नियंत्रण हेतु स्पाइनेटोरम 1 मि०ली० प्रति 3 ली० पानी के साथ या क्लोरोसाइपर (क्लोरोपाइरीफॉस 50 %+ साइपरमेथ्रिन 5%) 2 मि०ली० प्रति ली० पानी के साथ घोलकर प्रथम छिड़काव तथा आवश्यकतानुसार 10-15 दिन बाद द्वितीय छिड़काव करने हेतु सलाह दी जाती है। आम के बौर को झुलसा एवं छोटे फलों को एन्थ्रेकनोज के प्रकोप से बचाव हेतु थायोफिनेट मिथाइल 1 ग्रा० प्रति ली० पानी के साथ या हेक्सामोनाजोल 2 ग्रा० प्रति ली० पानी के साथ छिड़काव करें।




