लखनऊ। (संवाददाता) कर्मचारी पेंशन योजना-1995 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी न होने से देश भर के 78 लाख पेंशनरों में रोष बढ़ रहा है। एक ओर सांसदों विधायकों के वेतन भत्ते
और पेंशन में मनचाही वृद्धि करने में सत्ता पक्ष और विपक्ष एकमत है दूसरी ओर ईपीएस-95 पेंशनर 8 वर्षों से न्यूनतम पेंशन 7500/- महीना, महंगाई भत्ता और मुफ्त चिकित्सा सुविधा की मांग को लेकर सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष कर रहे हैं। सरकार द्वारा बार-बार झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं पर कोई ठोस कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।
अपनी मांगों के समर्थन में आज पेंशनरों ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के गोमती नगर स्थित कार्यालय पर प्रदर्शन कियाI सभा को संबोधित करते हुए अनेक वक्ताओं ने कहाकि अगर सरकार उनकी मांगों को शीघ्र नहीं मानती है तो विवश होकर दिल्ली सहित देश के अन्य भागों में व्यापक प्रदर्शन होंगे जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।
पेंशनरों ने केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडवीया के नाम ज्ञापन आयुक्त नवीन कनौजिया को सौपा और उन्हें पेंशनरों की समस्याओं से अवगत कराया। आयुक्त ने कहा कि वह पेंशनरों के हालात से भली भांति परिचित है और वह उनका ज्ञापन अपनी संस्तुति सहित श्रममंत्री को भेजेंगे।
प्रदर्शन स्थल पर आयोजित सभा को राष्ट्रीय सचिव राजीव भटनागर,प्रांतीय महामंत्री राजशेखर नागर,आर एन द्विवेदी,संगठन मंत्री पी के श्रीवास्तव, के एस तिवारी, मुख्य समन्वयक उमाकांत सिंह बिसेन,मीडिया प्रभारी सुभाष चौबे,कोषाध्यक्ष दिलीप पांडे, नासिर अली, जय राम वर्मा, हरिशंकर गुप्ता, जी के बहल, विजय सिंह, एस के त्यागी,सतीश अग्निहोत्री, नरेश राय , अरविंद श्रीवास्तव महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष गीता वर्मा एवं महामंत्री सुनीता सोनकर,अखिलेश दयाल एवं श्रीमती लक्ष्मी आदि ने संबोधित किया।




