लखनऊ। उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय राय जी पूर्व मंत्री ने आज केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली एनसीआर में नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म तथा उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में पुलिस हिरासत में हुई
मृत्यु के संबंध में उत्तर प्रदेश की लगातार बिगड़ती जा रही कानून व्यवस्था और बढ़ते हुए अपराधों पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा रिपोर्ट तलब करने के साथ ही साथ दोनों पीड़ितों के परिजनों को उनकी सहमति के अनुरूप तत्काल समुचित मुआवजे दिए जाने के निर्देश जारी किए जाने की मांग की है। पत्र की प्रति संलग्न है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में आगे लिखा है कि उत्तर प्रदेश में नागरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति बहुत लंबे समय से बद से बदतर हो गयी है। उत्तर प्रदेश की हाल की दो घटनाओं ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और आम नागरिक के मानवाधिकारों को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। मैनपुरी की 16 वर्षीय कक्षा 11 की छात्रा 4 अगस्त की रात ग्रेटर नोएडा के परी चैक से नोएडा के सेक्टर-63 जाने के लिए स्लीपर बस में यात्रा करने के दौरान वाहन चालक और परिचालक ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बस लगभग 47 किलोमीटर तक दिल्ली की सड़कों पर चलती रही। इस अपराध की घटना का दायरा उत्तर प्रदेश के एनसीआर से दिल्ली तक फैला हुआ है।
श्री अजय राय ने कहा है कि यद्यपि दोनों आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके है, किन्तु सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश के नोएडा और देश की राजधानी दिल्ली की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार पुलिस प्रशासन के अधिकारी 47 किलोमीटर तक अकेली कन्या के साथ चलती इस बस का कोई संज्ञान क्यों नहीं ले सके और इससे भी बड़ा सवाल है कि घटना की जानकारी 25 दिनों तक किसके आदेश पर छिपाई गई। यदि बस में अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी, जीपीएस अथवा अन्य निगरानी व्यवस्था नहीं थी, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इसके साथ ही आवश्यक है कि पीड़ित छात्रा की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखते हुए उसे परिजनों सहित सुरक्षा और चिकित्सकीय सहायता दी जाए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में बदायूं जनपद में घटी एक अन्य गंभीर घटना जिसमें दातागंज थाने में राजेश कोरी की पुलिस हिरासत में मृत्यु हुई है। परिजनों ने पुलिस प्रताड़ना और पिटाई का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होने कहा कि वह स्वयं उनके परिवार से मिलकर आये हैं। पुलिस की हिरासत में नागरिक की मृत्यु एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था में मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। (पुलिस कस्टडी) हवालात में मृत्यु पर उत्तर प्रदेश की सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों को भी कठोर दंड दिया जाए।





