August 8, 2026 2:23 am

उत्तर प्रदेश ने शिक्षा और कौशल विकास के नए खाके की रखी नींव,उद्योग की जरूरतों के अनुरूप होगी शिक्षा प्रणाली

लखनऊ। उत्तर प्रदेश अपने शिक्षा और कौशल विकास तंत्र में एक मौलिक परिवर्तन की दिशा में अग्रसर है। राज्य अब ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है जहाँ उद्योग जगत प्रशिक्षण और शिक्षा संस्थानों में अधिक निवेश करेगा तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक और रोजगारपरक कौशल सिखाने पर बल दिया जाएगा।

इसी विषय पर सोमवार को ASSOCHAM द्वारा आयोजित UP EduCon-2025 सम्मेलन में नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में स्नातकों की कम नियुक्ति दर और उद्योग की आवश्यकताओं तथा विद्यार्थियों के कौशल के बीच असंतुलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

साझा जिम्मेदारी और व्यावहारिक शिक्षा की दिशा में कदम
राज्य के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने एक साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसके अंतर्गत कौशल विकास, सांस्कृतिक मूल्यों और समान अवसरों को शिक्षा प्रणाली में समाहित करने पर बल दिया गया।

कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 राज्य की रणनीति का आधार है। उन्होंने कहा, “NEP 2020 में स्किलिंग एक प्रमुख हिस्सा है और ASSOCHAM युवाओं को प्रशिक्षित करने में शानदार कार्य कर रहा है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ विज़न को ASSOCHAM के प्रयासों से जोड़ते हुए कहा कि “उद्योग जगत और कौशल विकास विभाग मिलकर बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।”

प्रो. डी. पी. सिंह, मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार ने 2047 तक 15 भारतीय संस्थानों को राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) और वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष स्थानों पर लानेका लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने इस लक्ष्य को प्रधानमंत्री के “5T फ्रेमवर्क” – Trade, Tourism, Technology, Talent, और Tradition से जोड़ा।

डॉ.हरि ओम, आईएएस, प्रमुख सचिव (कौशल विकास एवं व्यावसायिक शिक्षा) ने कहा कि “आर्थिक प्रगति हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है।” उन्होंने भगवान बुद्ध और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा, “हमें अपनी परंपराओं और संस्कृति से भलीभांति परिचित रहना चाहिए।”

उन्होंने उद्यमिता आधारित शिक्षा मॉडल की वकालत की जो छात्रों में आत्मनिर्भरता और नवाचार को प्रोत्साहित करे।पुलकित खरे, आईएएस, मिशन निदेशक (UP स्किल डेवलपमेंट मिशन) ने कहा कि “राज्य के प्रत्येक हिस्से तक यह विकास पहुँचे, यही हमारा लक्ष्य है।” उन्होंने NEP 2020 को द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रतिबद्धता जताई।

जी. के. गोस्वामी, आईपीएस, पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (उत्तर प्रदेश पुलिस) ने डेटा सुरक्षा और कौशल अंतराल (skills gap) पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “डिजिटल युग में डेटा सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।”

उन्होंने “5Es फ्रेमवर्क” प्रस्तुत किया – Education, Experience, Exposure, Ecosystem, और Excellence – जो शिक्षा की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों को सशक्त करेगा।हसन याकूब, सह-अध्यक्ष (ASSOCHAM राज्य कौशल विकास परिषद, उत्तर प्रदेश) ने सुझाव दिया कि कौशल विकास की लागत का 80% हिस्सा उद्योग जगत को और 20% रोजगार बजट से वहन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “शिक्षा कोई लक्ष्य नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है।” याकूब ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स जैसे Elevate को स्थानीय प्रतिभा को वैश्विक कंपनियों से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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