न्यूज ऑफ इंडिया (एजेंसी) लखनऊ। मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण नियमावली, 2025 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह नियमावली सरकारी गजट में प्रकाशित किए जाने के दिनांक से प्रवृत्त होगी।
उल्लेखनीय है कि अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1985 के अन्तर्गत भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आई0डब्ल्यू0ए0आई0) का गठन किया गया है। भारत सरकार द्वारा अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के कार्यों को सुचारु रूप से सम्पादित किए जाने हेतु भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग नियमावली, 1986 का प्रख्यापन किया गया है। इसके दृष्टिगत प्रदेश में जल परिवहन एवं जल पर्यटन को विकसित करने के उद्देश्य से उ0प्र0 अन्तर्देशीय जलमार्ग अधिनियम, 2023 को प्रख्यापित/अधिसूचित किया गया है, जिसके अन्तर्गत उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का गठन किया जाना है। इस प्रकार प्रदेश में नवगठित होने वाले उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के कार्यों को सुचारु रूप से सम्पादित किए जाने के प्रयोजनार्थ उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण नियमावली, 2025 के प्रख्यापन का निर्णय लिया गया है।
भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अन्तर्गत 111 राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए गए हैं, जो देश के भिन्न-भिन्न राज्यों में अवस्थित है। उत्तर प्रदेश में गंगा नदी, यमुना नदी एवं अन्य प्रमुख नदियों में कुल 11 राष्ट्रीय जलमार्ग स्थित हैं। अतः उत्तर प्रदेश में अपेक्षाकृत सस्ता परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु जल परिवहन एवं जल पर्यटन को विकसित करने में उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की भूमिका है।
इसके दृष्टिगत प्रस्तावित उत्तर प्रदेश अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण नियमावली, 2025 में मुख्यतः प्राधिकरण के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की शक्तियां और कर्तव्य, आवासीय व्यवस्था, यात्रा भत्ता, प्राधिकरण की बैठकों की प्रक्रिया, प्राधिकरण के कोरम, प्राधिकरण में सलाहकार समिति का गठन, सलाहकार समितियों के कार्य संचालन की प्रक्रिया, प्राधिकरण के सदस्यों का कार्यकाल, प्राधिकरण में विशेषज्ञों का पैनल, प्राधिकरण के बजट, लेखा एवं लेखापरीक्षा से सम्बन्धित मामलों, प्राधिकरण की वार्षिक लेखा रिपोर्ट, प्राधिकरण की आरक्षित निधि तथा भूमि या सम्पत्ति में प्रवेश करने का अधिकार से सम्बन्धित प्राविधानों को सम्मिलित किया गया है।
इस प्राधिकरण के संघटन में अध्यक्ष के पद पर मुख्यमंत्री जी द्वारा परिवहन मंत्री अथवा अन्तर्देशीय जलमार्ग, शिपिंग एवं नेवीगेशन, पोर्ट्स, मेरीटाइम अफेयर्स से सम्बन्धित मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले व्यक्तियों में से किसी एक व्यक्ति को नियुक्त किया जाएगा। उपाध्यक्ष के पद पर अन्तर्देशीय जलमार्ग, शिपिंग एवं नेवीगेशन, पोर्ट्स, मेरीटाइम अफेयर्स से सम्बन्धित मामलों में विशेषज्ञता रखने वाले एवं प्रोफेशनल अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से किसी एक व्यक्ति की राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति की जाएगी।
वित्त, लोक निर्माण, परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति, सिंचाई एवं जल संसाधन और वन एवं पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव पदेन सदस्य होंगे। एक अन्य सदस्य भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आई0डब्ल्यू0ए0आई0) का प्रतिनिधि होगा, जिसे आई0डब्ल्यू0ए0आई0 के अध्यक्ष द्वारा नामित किया जाएगा। परिवहन आयुक्त, उ0प्र0 मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे।
प्राधिकरण के गठन से आम जनमानस को जल परिवहन के रूप में सुगम एवं प्रदूषण रहित परिवहन की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। प्रदेश के उत्पादों को बेहतर एवं सस्ती दरों पर देश के अन्य राज्यों तथा विदेशों में निर्यात के अवसर मिलेंगे। ओ0डी0ओ0पी0 एवं एम0एस0एम0ई0 उत्पादों को विशेष लाभ मिलेगा। प्रदेश में राष्ट्रीय जलमार्ग के अतिरिक्त नए राज्य जलमार्गों का सृजन एवं विकास होगा। प्रदेश के जल मार्गों के विकास से नदियों का संवर्धन एवं संरक्षण होगा। प्रदेश में नदी तट पर स्थित तीर्थ स्थलों एवं ऐतिहासिक स्थलों का भी जल पर्यटन की दृष्टि से विकास हो सकेगा।




