मलिहाबाद,लखनऊ। (संवाददाता) यूरिया एकमात्र ऐसा उर्वरक है जिसका मूल्य निर्धारण और वितरण सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति एमआरपी से अधिक कीमत पर यूरिया नहीं बेच सकता है। इन दिनों यूरिया उर्वरक की कीमतें कुछ इलाकों में मनमानी ढंग से बढ़ाई जा रही हैं, जिससे किसान परेशान हैं। सरकार द्वारा तय एमआरपी से अधिक कीमत पर यूरिया बेची जा रही है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।
यूरिया की अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) भारत सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है। वर्तमान में, 45 किलो की यूरिया की बोरी की एमआरपी 266.50 रुपए है। कुछ इलाकों में, दुकानदार यूरिया की कमी का हवाला देकर मनमाने दाम पर यूरिया बेच रहे हैं। मलिहाबाद क्षेत्र के किसान विनोद कुमार ने बताया कि बीते गुरुवार को उसने माल रोड स्थित एक खाद भंडार से एक बोरी यूरिया खाद ली थी। जहां आधार कार्ड व फोन नंबर लेने के बाद बायोमैट्रिक कर 266.50 रुपए की रशीद दी गई। लेकिन यूरिया की बोरी के दाम 300 रुपए लिए गए।
यह तो मात्र एक उदाहरण है। यूरिया की ऊंची कीमतों से किसानों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें अपनी खेती के लिए जरूरी खाद उचित कीमत पर नहीं मिल पा रही है। अगर मिल भी रही है तो महंगे दामों में स्थानीय प्रशासन को इस समस्या से निपटने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है। इस संबंध में सहायक विकास अधिकारी (कृषि) मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि यदि किसानों को प्रिंट रेट से अधिक खाद बेची जा रही है तो जांच कर सख्त करवाई की जाएगी।




