कातिलों तक नहीं पहुंच पाती पुलिस, एक महीने बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी काकोरी पुलिस
पहले की घटनाओं से भी नहीं लिया सबक, मड़ियांव की तरह पहेली बना महिला हत्याकांड
अभी तक न तो शव की हुई शिनाख्त और न ही मिले खूनी
ए अहमद सौदागर लखनऊ। राजधानी में बेखौफ अपराधियों के आगे पुलिस बेबस नजर आ रही है। एक के बाद एक बढ़ती आपराधिक वारदात से महिला-पुरुष व लड़कियां दहशत में हैं।
नौ अप्रैल 2026 को काकोरी क्षेत्र के इब्राहिमपुर मदारपुर गांव में एक महिला की बदमाशों ने बेरहमी से कत्ल कर कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती है।
इब्राहिमपुर मदारपुर गांव के बाहर जिस तरह से हाथ बांधकर हत्यारों ने घटना को अंजाम दिया इससे यही लग रहा है कि इंस्पेक्टर काकोरी सतीश चन्द्र राठौर अपने क्षेत्र में अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहें हैं।
दरअसल इस क्षेत्र में पहले भी कई संगीन वारदातें हो चुकी हैं। यहां हत्या, लूट, डकैती व चोरी जैसी घटना होने का पुराना इतिहास रहा है। पुलिस जिस घटना में नामजद आरोपी मिला तो उसे दबोचकर आनन-फानन में सलाखों के पीछे भेजा, लेकिन अज्ञात शवों का उजागर करने में पुलिस के पसीने छूट जाते हैं। ठीक इसी तरह मड़ियांव थाना क्षेत्र के आईआईएम रोड पर दो महिलाओं की हत्या कर फेंकी गई लाश मिली थी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अफसरों से लेकर उनके मातहत दो-चार दिनों तक खूब तेजी दिखाई, लेकिन आज तक पता नहीं चल पाया कि वह महिलाएं कहां की थी और उन्हें किसने मौत की नींद सुलाया। पुलिस की पूरी कवायद फिलहाल आज भी फाइलों में गोते लगा रही हैं।
कहीं मड़ियांव क्षेत्र में हुए डबल मर्डर की तरह इब्राहिमपुर मदारपुर गांव में हुई महिला की हत्या न पहेली बन कर रह जाए। वैसे तो देखा जाए तो बहू बेटियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस के आलाधिकारी तमाम तरह की योजनाएं बनाई और चलाईं, लेकिन कातिलों के आतंक के आगे घुटने टेक कर रह गई। फिलहाल यह तो महज बानगी भर इससे पहले भी कई घटनाओं में कमिश्नरेट पुलिस की पोल खुल चुकी हैं। जिस तरह से बुधवार को इंस्पेक्टर काकोरी सतीश चन्द्र राठौर की टीम ने कई गुड वर्क कर वाहवाही बटोरी, इससे यही लग रहा है स्थानीय पुलिस नामजद आरोपियों को दबोचने में माहिर है। इब्राहिमपुर मदारपुर गांव के बाहर जिस महिला की हत्या कर लाश मिली थी वह कहां की थी और किसने उसकी जान ली करीब एक महीने बीतने के बाद भी काकोरी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।




