June 4, 2026 12:30 am

गरीबी उन्मूलन में सहायक सिद्ध हो रही मनरेगा योजना

न्यूज ऑफ इंडिया (एजेन्सी) लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व व निर्देशन में प्रदेश में मनरेगा योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में निवास कर रहे परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को उनकी मांग के अनुसार रोजगार उपलब्ध करने का उद्देश्य शत-प्रतिशत पूरा हो रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक मांग-आधारित मजदूरी रोजगार कार्यक्रम है। उत्तर प्रदेश में गरीब परिवारों को आर्थिक तौर पर मजबूत करना और ग्रामीण परिवेश में रह रहे वयस्क नागरिकों को रोजगार के लिये न भटकना पड़े, इसको लेकर लगातार मनरेगा के माध्यम से श्रमिकों को रोजगार उनके ही गाँव में उपलब्ध कराया जा रहा है।

ग्राम्य विकास विभाग द्वारा समय-समय पर जन कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से रोजगार सृजन किया जा रहा है। ग्राम्य विकास विभाग का उद्देश्य ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोगों को उन सभी मूलभूत सुविधाओं को पहुँचाना है, जो आम जनता को मिलनी चाहिए।गांवों में रहने वाले श्रमिकों को समय-समय पर रोजगार उपलब्ध कराना भी विभाग द्वारा सुनिश्चित किया जाता है। ग्राम्य विकास विभाग मनरेगा योजना के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कार्याे के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध करा रहा है।वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 में रोजगार की मांग के अनुरूप करीब-करीब 100 फीसदी रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 58,42,483 से अधिक श्रमिकों ने रोजगार की मांग की, जिसमें लगभग सभी को रोजगार उपलब्ध करा दिया गया है।

’मानव दिवस सृजन में हो रही बढ़ोतरी’ग्राम्य विकास आयुक्त श्री जी एस प्रियदर्शी ने बताया कि मनरेगा योजना के अंतर्गत मानव दिवस सृजन के मामले में उत्तर प्रदेश लगातार अग्रणी राज्य की श्रेणी में रहा है। बीते 3 वर्षों की बात करें तो जहां 2021-22 में 32.56 करोड़ मानव दिवस सृजित किये गये थे, वर्ष 2022-23 में 31.15 करोड़ मानव दिवस सृजित किये गये, तो वहीं वित्तीय वर्ष 2023-24 में 34.53 करोड़ से ज्यादा मानव दिवस सृजित किये गये। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 26 करोड़ मानव दिवस सृजन के लक्ष्य के सापेक्ष प्रदेश में 12.62 करोड़ से अधिक मानव दिवस सृजित हुए हैं।

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