August 8, 2026 2:22 am

ग्राम प्रधान एवं सचिव के द्वारा मनरेगा योजना के तहत कराए गए विकास कार्यों की जांच मनरेगा के लोकपाल से जांच कराए जाने की मांग की

मलिहाबाद, लखनऊ। (संवाददाता) राजधानी लखनऊ की विकासखंड माल की ग्राम पंचायत हसनपुर में काफी समय से केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण मनरेगा योजना जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों के लिए वरदान साबित हो रही है वहीं दूसरी ओर ग्राम रोजगार सेवक ग्राम प्रधान और सचिवों के साथ-साथ विकासखंड कार्यालय में बैठे एपीओ और तकनीकी सहायक लगातार मालामाल होते चले जा रहे हैं क्योंकि जिन पंचायत में फर्जी हाजिरी लगाकर हजारों लाखों का घोटाला किया जा रहा है। उनमें सभी बराबर के हिस्सेदार होते दिखाई दे रहे हैं क्योंकि जहां कहीं से भी अधिकारियों के पास मनरेगा घोटाले की शिकायत पहुंचती है वहां सभी जिम्मेदार अधिकारी मामले में लीपा पोती करने में लग जाते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि किसी भी पंचायत में जांच करने वाले अधिकारी गांव में जाकर शिकायतकर्ताओं के अलावा किसी गांव वाले से नहीं मिलते हैं गांव में जाकर वह उन्हें भ्रष्टाचारियों से मिलकर और सांठ गांठ के तहत प्रधान और सचिव के अलावा रोजगार सेवक के इशारे पर उन्हीं लोगों को बुलाया जाता है जो काम पर आते हैं और उन्हें कभी नहीं बुलाया जाता है जिनके नाम से फर्जी पैसा निकलता है।

विकासखंड माल की ग्राम पंचायत हसनापुर में दो खडन्जों का काम बीते मार्च से शुरू होकर जुलाई तक समाप्त हो गया था परंतु अभी तक फर्जी लोगों को उन खड़ंजों पर खड़ा करके 10 से 20 तक संख्या कम ज्यादा करके रोज फर्जी फोटो अपलोड की जा रही हैं जबकि ग्रामीणों के अनुसार इन दोनों रास्तों पर करीब एक माह पहले काम बंद हो चुका है। ग्रामीणों के अनुसार जब इलाके में तेज बारिश हुई थी उसके पहले काम समाप्त हो चुका था परंतु आज भी हाजिरी लग रही है। इसी तरह ग्राम पंचायत गहदों में एक कच्चे रास्ते पर एक महीने से काम चल रहा था और शुरुआत से ही यहां चार-पांच मजदूर काम कर रहे थे और हाजिरी 18-20 की लगाई जा रही थी यहां भी बीती 11 तारीख के आसपास काम समाप्त हो चुका था परंतु आज भी यहां फर्जी हाजिरी लगाने का काम चल रहा है जबकि इसमें पहले ही मजदूरी के नाम पर कुछ जगहों पर मिट्टी डालकर बाकी पूरे रास्ते पर सिर्फ घास छीली गई थी। तकनीकी सहायकों की मिलीभगत से ऐसे रास्तों पर जो पहले से बने हुए हैं उनमें सबसे बड़ा भ्रष्टाचार और अवैध कमाई हो रही है। इसी प्रकार विकासखंड मलिहाबाद की ग्राम पंचायत बदौरा में 2 महीने पहले वृक्षारोपण का काम बंद हो चुका था परंतु 2 महीने से लगातार दर्जन भर से अधिक मजदूरों की फर्जी हाजिरी लग रही है इस बात की पुष्टि इसी ग्राम पंचायत के पंचायत सहायक ने फोन पर जानकारी देते हुए की। इसके अलावा यहां और ग्राम पंचायत रसैना में 15 अगस्त को भी हाजिरी लगाई गई थी। यहां के दो मजदूर अवध राम और बराती ने कहा कि वह पूरे साल भर के लिए चौकीदार हैं। वह 3 साल से लगातार चौकीदारी का काम कर रहे हैं जबकि उनकी हाजिरी तालाब पर वृक्षारोपण में दिखाई जा रही है इसके अलावा यहां आज भी वृक्षारोपण के नाम पर 18 मजदूरों की हाजिरी लगाई गई है, जबकि अलग-अलग तारीखों में यहां मजदूरों की संख्या कम ज्यादा कर दी जाती है जबकि इस समय यहां वृक्षारोपण के बाद इतने मजदूरों का कोई काम नहीं है इन्हें दूसरी जगह काम दिया जाना चाहिए बावजूद इसके यहां सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। इसी तरह ग्राम पंचायत कहला में एक कच्चे रास्ते पर करीब 1 महीने से हाजिरी लग रही है जबकि यहां थोड़े दिन घास छीलने के बाद आसपास धान लग जाने के कारण मिट्टी खोदने लायक नहीं बची है अब दो दिन से फिर काम शुरू किया गया है और इसके पहले दो-तीन दिन और काम किया गया है। मौके की स्थिति देखने से पता चलता है कि यहां काफी समय तक काम बंद रहा है और जितने मजदूर यहां दिखाई जा रहे हैं उतने मजदूर काम पर नहीं होते हैं। तकनीकी सहायकों का हाल यह है कि वह मौके पर जाने के बजाय कार्यालय में बैठकर ही सारा काम कर देते हैं चाहे एस्टीमेट बनाना हो या एमबी करनी हो, क्योंकि भ्रष्टाचार में उनकी भी कमाई बढ़ जाती है। जहां महीनों से हाजिरी नहीं लग रही है वहां की एमबी किस आधार पर की जाएगी यह सबसे बड़ा सवाल है? अगर वहां फर्जी काम की एमबी की जाती है तो इसके लिए जितने लोग भुगतान करने में हस्ताक्षर करेंगे। वह सभी अधिकारी कर्मचारी जिम्मेदार होंगे। अब देखना है कि जिस तरह पहले से भ्रष्टाचार की धनराशि में बंदर बांट हो रही है इसी तरह बंदर बाँट जारी रहेगी या फिर कार्रवाई भी होगी। विकासखंड माल की ग्राम पंचायत हसनापुर में पहले भी एक रास्ते पर इंटरलॉकिंग लगाने से पहले वहां का खड़ंजा उखाड़ कर बेच दिया गया था जिससे वहां वह इंटरलॉकिंग नीची हो गई है और जिस तरह खड़ंजे पर पानी भर रहा था इस तरह इंटरलॉकिंग पर भी पानी भरने लगा है। ग्रामीणों के साथ- साथ साथ पूर्व प्रधान जो वर्तमान प्रधान की जगह काम कर रहा है उसने कहा था कि ठेकेदार ने खड़ंजा बेच दिया था। उसके बाद तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी ने जांच करने की बात कही थी परंतु वह भी बिना जांच कराए ही लीपा पोती करके चले गए जब काफी समय निकाला जा रहा, आज पुनः प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि इसकी जांच जिले के उच्च अधिकारियों में से लोकपाल मनरेगा के द्वारा जांच कराए जाने की मांग कर रहे हैं।

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