लखनऊ। विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर चंदन हॉस्पिटल, लखनऊ में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें “स्ट्रोक सुपरस्टारों” (स्ट्रोक से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे लोगों) को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्ट्रोक की रोकथाम, पहचान और समय पर उपचार के महत्व पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था – लोगों में यह जागरूकता फैलाना कि स्ट्रोक की पहचान और त्वरित कार्रवाई जीवन बचा सकती है।चंदन हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख और अध्यक्ष डॉ. अरविंद बिहारी ने बताया कि भारत में स्ट्रोक मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है और इसकी रोकथाम समय पर उपचार से संभव है। उन्होंने कहा, “हर मिनट मायने रखता है”, क्योंकि स्ट्रोक के प्रत्येक मिनट में मस्तिष्क की लाखों कोशिकाएं नष्ट होती हैं। उन्होंने लोगों से B.E.F.A.S.T. (Balance, Eyes, Face, Arm, Speech, Time) के लक्षण पहचानने और तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की।
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न्यूरोलॉजी विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. राजन कुमार ने कहा कि “रोकथाम ही उपचार की शुरुआत है।” उन्होंने युवाओं में बढ़ती स्ट्रोक की घटनाओं को देखते हुए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव नियंत्रण की सलाह दी।हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मोहम्मद फारुक अंसारी ने बताया कि चंदन हॉस्पिटल पूरी तरह से 24×7 स्ट्रोक-रेडी सेंटर है, जहाँ थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपी (खून का थक्का घोलने की दवा) और थ्रोम्बेक्टॉमी प्रक्रिया (थक्का हटाने की तकनीक) जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। अस्पताल में न्यूरो चिकित्सक, न्यूरोसर्जन, रेडियोलॉजिस्ट और फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों की समर्पित टीम मरीजों को सर्वोत्तम देखभाल प्रदान करती है।
कार्यक्रम में उपस्थित डॉक्टरों ने कहा कि स्ट्रोक के प्रति जागरूकता ही इसके खतरे को कम कर सकती है। चंदन हॉस्पिटल का यह प्रयास समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।




