August 8, 2026 2:22 am

चारों श्रम कानूनों, बिजली के निजीकरण और ठेका प्रथा के विरोध में राजधानी में किसानों का विरोध-प्रदर्शन

लखनऊ। केन्द्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल और किसानों की बाकी मांगों को लेकर राजधानी में श्रमिक संगठनों के साथ किसानों ने विरोध -प्रदर्शन किया।

खरगापुर तहसील मुख्यालय पर एसकेएम के घटक संगठन क्रांतिकारी किसान यूनियन और भाकियू राष्ट्रवादी ने धरना-प्रदर्शन किया। धरने को संबोधित करते हुए क्रांतिकारी किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष एकादशी यादव ने कहा कि किसान-मजदूर की ऐतिहासिक एकता का प्रमाण है यह आम हड़ताल। शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, यातायात सभी जनता की जरूरतों को निजी हाथों में सौंपने की सरकार की हर कार्यवाही किसान पूरजोर विरोध करेंगें। उन्होंने राजधानी में चिनहट औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के शोषण के मुद्दे को भी उठाया। यूनियन एक साल से टाटा-टेल्को आदि औद्योगिक संस्थानों में कार्यरत मजदूरों की ग्रेजुइटी-बोनस और अन्य बकाया हितलाभों के लिए संघर्षरत है।

धरने-प्रदर्शन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा की राज्य इकाई की ओर से राष्ट्रपति को संबोधित 11 सूत्रीय मांग पत्र उप जिलाधिकारी को सौंपा गया। मांगपत्र में चारों श्रम कानूनों की वापसी, पुरानी पेंशन बहाली, यूपी में बिजली के निजीकरण एवं बिजली रेटों में वृद्धि के प्रस्ताव की वापसी की मांग उठाई। यूपी में मर्जर के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद करने की मांग भी शामिल रही।

धरना-प्रदर्शन में क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष रामरतन यादव, लखनऊ मंडल प्रभारी दिनेश कुमार, उपाध्यक्ष विशंभर दयाल, भाकियू राष्ट्रवादी के उपाध्यक्ष अशोक यादव के अलावा सैंकड़ों किसान एवं मजदूर शामिल रहे।

उधर बिजली कर्मचारियों द्वारा शक्ति भवन पर आयोजित प्रदर्शन में भाकियू श्रमिक जनशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश यादव के नेतृत्व में किसान भी शामिल हुए।

 

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