अधिकारियों के पेंच कसने के बाद भी संगीन घटनाओं की जांच पड़ताल में नहीं बढ़ रहे कदम
हवा में पुलिस चला रही तीर, परिजनों को मिल रही निराशा
खुर्रमपुर गांव में हुई घटना का मामला
ए अहमद सौदागर लखनऊ। कहते हैं कि अपराधी मौका-ए-वारदात पर कोई न कोई सुबूत जरुर छोड़ता है। पुलिस उसके सहारे गुनाहगार तक पहुंच जाती है। छानबीन में सामने आए तथ्य वारदात की तह तक पहुंचने में पुलिस को मदद करते हैं, लेकिन राजधानी पुलिस के लिए इन दिनों अपराधियों तक पहुंचना और साक्ष्य संकलन चुनौती साबित हो रहा है। यही वजह है कि पुलिस के जिम्मेदार अफसरों को आए दिन समीक्षा बैठक कर मातहतों के पेंच कसने पड़ रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर नजर डालें तो 18 सितंबर 2026 की रात बंथरा थाना क्षेत्र स्थित खुर्रमपुर गांव में घर में अकेली रह रहीं 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला छिदाना गौतम की किसी धारदार हथियार से गला रेत कर हत्यारों ने मौत की नींद सुलाने के बाद भाग निकले थे। इस सनसनीखेज मामले का राजफाश करने के लिए पुलिस ने बदमाशों की तलाश में सर्विलांस से लेकर जमीनी मुखबिर तंत्र के सहारे खोजबीन की, लेकिन बीस दिन गुजरने के बाद भी पुलिस इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी कि आखिर छिदाना गौतम की जान किसने और क्यों ली।
हालांकि लखनऊ पुलिस के लिए यह कोई पहली नाकामी नहीं, इससे पहले भी हुई कई संगीन घटनाओं के मामले में फेल साबित हुई है। कातिलों की तलाश में पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन आज तक खून बहाने वाले हत्यारों की गर्दन तक पहुंचने में नाकाम रही। गौर करें तो काकोरी क्षेत्र स्थित इब्राहिमपुर मदारपुर गांव में एक महिला की हत्या कर लाश मिली थी। इस सनसनीखेज वारदात के मामले में अभी तक पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।





