बीस सोने का कंगन, पांच सोने का हार, एक ब्रेसलेट व 18 लाख पचास हजार रुपए की नकदी बरामद
ए अहमद सौदागर लखनऊ। कहावत नहीं बल्कि हकीकत है कि लालच करना कभी-कभी बेहद ख़तरनाक होता है इसके बावजूद चंद रुपयों के लालच में आकर सर्राफा कारोबारी अपनी जीवन भर की कमाई पल भर में ही गंवा बैठते हैं। ऐसा ही एक मामला बुधवार को सामने आया है जहां चौक के सर्राफा कारोबारी संजीव कुमार रस्तोगी को एक टप्पेबाज चार सोने की ईंट बताकर उनसे लाखों रुपए की ठगी कर ली। इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय की टीम ने इस घटना का राजफाश कर बुधवार को हाईटेक टप्पेबाज अनवर को मुखबिर की सूचना पर धरदबोचा। इस गिरोह में शामिल आशू, मुशाहिद व सरफराज नाम के टप्पेबाज अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। इंस्पेक्टर का कहना है कि फरार आरोपितों की तलाश में उनकी टीम उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
पुलिस को पकड़े गए टप्पेबाज के पास से 24 सोने के कंगन, पांच सोने के हार, एक ब्रेसलेट व 18 लाख पचास हजार रुपए की नकदी बरामद हुई है।
इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय के मुताबिक ठाकुरगंज क्षेत्र के पीर बुखारा निवासी संजीव कुमार रस्तोगी की चौक इलाके में सोने-चांदी की दुकान है। उन्होंने बताया कि सर्राफा कारोबारी संजीव कुमार रस्तोगी ने दस सितंबर 2026 को थाने में तहरीर देकर बताया कि एक शख्स अपने तीन साथियों के साथ मिलकर उनकी दुकान में दाखिल हुआ और सोने की परत चढ़ी चार ईंटों को असली सोना बताकर उनके हाथों बीस लाख रुपए में बेचकर भाग निकले। बताया जा रहा है सर्राफा कारोबारी को बाद में पता चला कि यह तो असली सोने का ईंट नहीं बल्कि नकली है तब खुद को ठगी होने का महसूस कर इसकी सूचना पुलिस को दी।
इंस्पेक्टर का कहना है कि पीड़ित कारोबारी की तहरीर पर अजय चौधरी व दो अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू की गई। इस मामले का राजफाश कर इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्याय की टीम ने बुधवार को इस गिरोह में शामिल हापुड़ जिले के किला कोना गढ़गेट कोतवाली नगर निवासी अनवर पुत्र अब्दुल अजीज को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह में शामिल आशू, मुशाहिद व सरफराज अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
ऐसे करते थे टप्पेबाजी
इंस्पेक्टर के मुताबिक पकड़े गए आरोपी ने पूछताछ में बताया कि इनका एक संगठित गिरोह है जो घटना के दौरान पहचान छिपाने एवं पुलिस से बचने के लिए एक ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे। यह भी बताया कि सिर्फ संबंधित व्यापारी से बातचीत के लिए किया जाता था तथा लखनऊ आने के बाद ही उक्त मोबाइल फोन को चालू करने की बात स्वीकार किया है। इंस्पेक्टर का कहना है कि आरोपित ने पूछताछ में यह भी बताया कि यह लोग सीसीटीवी कैमरे में कैद न हों इससे बचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट व बसों का अधिकतम इस्तेमाल करते थे। पुलिस मामले के मुताबिक इस गिरोह में कितने लोग और शामिल हैं इसके बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है।





