November 4, 2026 2:13 pm

जघन्य अपराध: अपनों के हाथों खून से लाल हो रहीं घर की दहलीजें

खून बहाने में नहीं हिचक रहे बिगड़ैल लाडले

पाल पोसकर बड़ा किया, पढ़ाया-लिखाया आखिरी पड़ाव पर बन गए दुश्मन 

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। तीन अक्टूबर 2025- पीजीआई क्षेत्र स्थित बाबू खेड़ा गांव में गहने चुराते समय मां ने देख लिया तो कलयुगी बेटे निखिल ने अपनी 45 वर्षीय मां रेनू को पेचकस से ताबड़तोड़ वारकर बेरहमी से मौत की नींद सुला दिया। पुलिस के हत्थे चढ़ा तो उसके खौफनाक करतूत सुनकर हर कोई दंग रह गया।

23 फरवरी 2026- आशियाना क्षेत्र के सेक्टर एल में रहने वाले 49 वर्षीय मानवेन्द्र सिंह का कत्ल उन्हीं 21 वर्षीय मनबढ़ बेटे अक्षत सिंह माथे पर बंदूक रखकर गोली मारकर हत्या कर दी।

इस खौफनाक मंजर पर गौर करें तो पिता की जान लेने के बाद बेखौफ अक्षत पिता के शरीर के टुकड़े करने के बाद हाथ-पैर जंगल में फेंक दिया और धड़ को ड्रम में छिपाकर रख दिया। सनसनीखेज वारदात करने के बाद खूनी खेल खेलने वाला बेटा खुद थाने पर पहुंचकर पिता की गुमशुदगी दर्ज करा दी, जांच-पड़ताल के दौरान राज खुला तो हर कोई सन्न रह गया। यह अक्षत अनपढ़ नहीं बल्कि बीकाम का छात्र है।

यही नहीं पिता का कत्ल करने वाला अक्षत अपनी नाबालिग बहन को भी डरा-धमकाकर घर में कैद कर दिया था।

एक अक्टूबर 2026- नाका क्षेत्र के राजेन्द्र नगर में रहने वाली 42 वर्षीय मां की नाबालिग 12वीं के छात्र ने समलैंगिकता का विरोध करने पर रिंच से ताबड़तोड़ वारकर मौत की नींद सुलाने के बाद बेखौफ नाबालिग मां की लाश के पास खड़ा रहा।

बेटा समलैंगिक है और इसे लेकर उसके माता-पिता इकलौते बेटे को समझाते थे, लेकिन यह सब बातें उसे नागवार गुजरी और मां को मौत के घाट उतार दिया।

राजधानी लखनऊ में हुई ये तीन घटनाएं मानो हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। हालांकि यह तो सिर्फ बानगी भर है, इससे पहले भी कई बार विभिन्न मामलों में अपने ही कातिल साबित हुए हैं। हालात यह है कि लोगों को बदमाशों से ज्यादा अपनों से डर लगने लगा है।

इस तर्ज पर हो रही वारदातों में पुलिस की भूमिका भी रिपोर्ट दर्ज करने और हत्यारों को गिरफ्तार करने तक सीमित है। पुलिस के पास इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।

राजधानी लखनऊ में शहरी क्षेत्र से बाहर ग्रामीण इलाकों पिछले वर्ष से लेकर हाल में हुई कुछ सनसनीखेज वारदात को छोड़ दें तो ज्यादातर में करीबी ही अपनों के कातिल के रूप में सामने आए हैं।

जरायम के रास्ते पर चल कर अमीर बनने या फिर गलत सोहबत अख्तियार करने के चक्कर में लोग अपने को ही निशाना बना रहे हैं।

गौर करें तो पीजीआई थाना क्षेत्र स्थित बाबू खेड़ा गांव में रहने वाली रेनू ने बेटे निखिल को गहने चुराते देख ली तो वह बौखला गया और मां की बेरहमी से हत्या कर दी।

आशियाना क्षेत्र के सेक्टर एल में रहने वाले मानवेन्द्र सिंह गलत सोहबत देख बेटे अक्षत को डांटा तो वह पिता का दुश्मन बन गया और उन्हीं की लाइसेंसी रायफल माथे पर सटाकर गोली मारकर हत्या कर दी। अक्षत की बेरहमी पर गौर करें तो किसी धारदार हथियार से पिता के शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर ड्रम में छिपाकर रख दिया और अपनी नाबालिग बहन को डरा-धमकाकर घर में कैद कर दिया था।

नाका थाना क्षेत्र के राजेन्द्र नगर में रहने वाली एक महिला महिला ने अपने नाबालिग बेटे का घिनौना खेल देखा तो वह उसे समझाने की कोशिश की तो रिंच से वारकर मां को मौत की नींद सुला दिया। राजधानी में इस तरह की घटनाओं की लंबी फेहरिस्त है। बीते दिनों और हाल की घटनाओं पर नजर डालें तो बदमाशों से ज्यादा अपने ही कातिल निकले हैं। इस तरह की वारदातों के बाद पुलिस छानबीन करती है। हत्यारा पकड़ा जाता है और फाइल बंद हो जाती है, लेकिन ये वारदातें कैसे थमेगी इस पर कोई होमवर्क नहीं किया गया। एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि जिन घटनाओं में करीबी वारदात कर रहे हैं उसे रोकने के लोगों को भी सतर्क रहना होगा तभी पुलिस इस तरह की घटनाओं को रोकने में सफल होगी।

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