August 8, 2026 4:06 am

जरायम: यूपी में पनप रहा संगठित अपराध, पुलिस की नींद उड़ी 

माफिया मुख्तार अंसारी के शूटर जीवा के बाद उसके करीबी शोएब को गोलियों से भूना 

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। कुछ दशक पहले माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला ने एके 47 से ताबड़तोड़ फायरिंग कर यूपी पुलिस को खुली चुनौती दी थी। राजधानी लखनऊ के जनपथ बाजार में दरोगा की हत्या ने बेखौफ होते अपराधियों के साथ ही संगठित अपराध को नई परिभाषा गढ़ी थी। इसके बाद लविवि ने भी छात्र राजनीति का खूनी खेल देखा। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने सख्ती बरती। कई बड़े कुख्यात बदमाश पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए। पिछले कुछ सालों में माफिया का दख़ल जमीन कारोबार में बढ़ा तो सड़कों पर उनके बीच संघर्ष की घटनाएं थम गई। अब एक बार फिर लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले के असैनी मोड़ पर माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी माने जाने वाले अधिवक्ता और हिस्ट्रीशीटर शोएब किदवई उर्फ बॉबी की हत्या ने एक बार फिर पुलिस के सामने नए सवाल खड़े कर दिए। सूबे में फिर संगठित अपराध पनप रहा है और गैंग वार की शक्ल में सामने आने लगा है।

राजधानी लखनऊ या उससे सटे जनपद बाराबंकी में माफिया का दख़ल रेलवे के बड़े टेंडरों को लेकर बढ़ा था।

गौर करें तो वर्ष 1998 में सदर क्षेत्र में रेलवे ठेकेदार व उपेंद्र विक्रम सिंह सहित तीन की हत्या ने पूरे पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया था। बाद में वर्ष 2000 में जेल अधीक्षक आरपी तिवारी की हत्या हुई। इसके बाद बदमाशों का दख़ल लखनऊ व बाराबंकी जिले में बढ़ता चला गया।

अब एक बार फिर बाराबंकी जिले में असलहों से ताबड़तोड़ गोलीबारी कर मुख्तार अंसारी के करीबी माने जाने वाले शोएब किदवई उर्फ बॉबी की हत्या ने पुलिस को ही पूरे महकमे को भी बेचैन कर दिया। गैंग वॉर की आंशका के साथ ही गैंग छोड़ने को लेकर मामला टटोला जा रहा है। शोएब किदवई उर्फ बॉबी के इतिहास पर नजर डालें तो एसपी बाराबंकी अर्पित विजयवर्गीय का कहना है कि शोएब के खिलाफ कोतवाली में पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं और इस कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर भी था। एसपी बाराबंकी का कहना है कातिलों की तलाश में की टीमें लगा दी गई हैं और इस मामले में कई बिंदुओं पर गहनता से छानबीन भी की जा रही है।

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