August 8, 2026 2:24 am

जिले के 82 स्कूलों के विलय से बच्चों की शिक्षा पर मंडरा रहा संकट

संवाददाता सऊद लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर शासन द्वारा विद्यालयों के विलय की कार्य योजना गतिमान है वहीं विभिन्न शिक्षक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि विद्यालय जबरन बंद कराए जा रहे है जिससे बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ेगा।

विकासखंड मलिहाबाद में विद्यालय विलय प्रक्रिया गतिमान है प्रथम चरण में 30 बच्चों से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को अन्य विद्यालयों में विलय किया गया जिसमें कुल 24 में से 22 स्कूल को पेयरिंग कर दिया गया है। इसी क्रम में 30 से 40 छात्र संख्या वाले 14 विद्यालयों में से 9 विद्यालयों को विलय कर दिया गया है । इस प्रकार विकासखंड मलिहाबाद में कुल 38 में से 31 स्कूल अन्य विद्यालयों में विलय करने की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है।अब शिक्षकों से 40 बच्चे लेकर 50 बच्चों तक नामांकन वाले विद्यालयों के शिक्षकों से विलय संबधी सहमत प्रस्ताव मांगे जा रहे हैं।

विलय के बीच कई ग्राम सभा में विद्यालय विलय को लेकर लोगों ने बवाल काटा । गौस खेड़ा में विलय को लेकर कई अभिभावकों ने अपना रोष प्रकट किया। प्राथमिक विद्यालय रमगढा के लोगों ने कहा कि विद्यालय को प्राथमिक विद्यालय कासमंडी कला एक में मर्ज किया जा रहा है वह गांव से 2 किलोमीटर दूर है और छोटे बच्चे इतनी दूर कैसे जाएंगे। प्राथमिक विद्यालय नत्था खेड़ा को बेसिक गौदा मौज्जम नगर में विलय कर दिया गया है। प्राथमिक विद्यालय महमूद नगर एक को बेसिक महमूद नगर में विलय किया गया है आश्चर्य की बात यह है कि बेसिक महमूद नगर में एक शिक्षक सरप्लस है ऐसे में महमूद नगर के अन्य शिक्षक के आने से इस विद्यालय में शिक्षकों की संख्या और अधिक सर प्लस हो जाएगी।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि विद्यालय विलय योजना आरटीई कानून का अतिक्रमण है इससे बच्चों की शिक्षा का अधिकार प्रभावित हो रहा है। इस आदेश को निरस्त करना चाहिए।

 

प्राथमिक शिक्षक संघ ने ब्लॉक संसाधन केंद्र पर दिया धरना

 

विद्यालय विलय के विरोध के बीच प्राथमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) ने प्रदेश के सभी ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन कर विद्यालय विलय के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की और ज्ञापन सौंपा।

 

विभाग की अधूरी तैयारी से शिक्षक व अभिभावक चिंतित

 

विद्यालय विलय होने के बाद 2 से 3 किलोमीटर की दूरी तय करके अगर बच्चे स्कूल पहुंच भी गए तो उनके बैठने की कोई व्यवस्था की तैयारी नहीं की गई है। जो आवश्यक सुविधाएं होनी चाहिए उसकी कोई व्यवस्था नहीं की गई है विद्यालय विलय के बाद शिक्षकों की संख्या भी बढ़ना तय है लेकिन उनको बैठने के लिए न तो कुर्सियों, मेजों की व्यवस्था की गई है और न ही कक्षा कक्षा का निर्धारण किया जा रहा है बच्चों की उपस्थिति कैसे लगेगी, उसके लिए रजिस्टर कैसे बनेंगे, नामांकन का क्या होगा आदि का कोई भी आदेश नहीं दिया गया है।

 

विद्यालय विलय का कोई मानक नहीं

 

शिक्षकों ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा विद्यालय विलय संबंधी आदेश में कहीं भी छात्र संख्या का कोई जिक्र नहीं है महानिदेशक बेसिक शिक्षा ने भी कहा आपसी सहमत के आधार पर विद्यालय विलय किए जाएंगे जबकि हो इसके विपरीत रहा है राजधानी सहित प्रदेश के कई जिलों में शिकायतें आ रही हैं कि कहीं 30 छात्र संख्या कहीं 40 कहीं 50 छात्र संख्या पर विद्यालयों को विलय किया जा रहा है इससे शिक्षकों में काफी रोष है । शिक्षकों का कहना है एक बच्चे की भी शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है और विभागीय अधिकारियों द्वारा 50 बच्चों के स्कूलों को भी बंद करने की योजना बना दी गई है।

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