तीन सौ करोड़ के रणनीतिक निवेश से भारतीय वुड कोटिंग सेक्टर को नई मजबूती
ए अहमद सौदागर लखनऊ। भारत की बढ़त से बुलंदियों पर प्रीमियम वुड कोटिंग कंपनी टेक्नोवेस (Technovace) ने जर्मनी की अग्रणी वुड कोटिंग कंपनी रेमर्स (Remmers) के साथ एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत रेमर्स, टेक्नोवेस में लगभग 300 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश करेगी, जिसके माध्यम से वह दो चरणों में 50.01 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राप्त करेगी।
बताया जा रहा है कि यह निवेश अब तक भारत के वुड कोटिंग सेक्टर में किए गए सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण विदेशी रणनीतिक निवेशों में से एक माना जा रहा है।
यूपी से निकले, वैश्विक पहचान की ओर
सनद रहे है कि टेक्नोवेस कंपनी के मालिक उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले के निवासी हैं। सीमित संसाधनों से शुरू हुई यह कंपनी आज प्रीमियम वुड कोटिंग सेगमेंट में एक मजबूत भारतीय ब्रांड के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है।
बढ़ते बाजार को देखते हुए हुआ निवेश
कंपनी प्रबंधन के अनुसार यह रणनीतिक निवेश ऐसे समय में हुआ है, जब भारत का वुड कोटिंग बाजार तेज़ी से विस्तार कर रहा है। वर्तमान में इस बाजार का आकार लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 10,000 करोड़ रुपये) आंका गया है।
प्रीमियम फर्नीचर, इंटीरियर फिनिशिंग और टिकाऊ निर्माण सामग्रियों की बढ़ती मांग के चलते इस सेक्टर में सालाना 11 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है।
आयात निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर
मजबूत कच्चे माल की उपलब्धता के बावजूद यह सेगमेंट अब तक काफी हद तक आयात पर निर्भर रहा है और यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं का दबदबा बना हुआ है। ऐसे में टेक्नोवेस और रेमर्स की यह साझेदारी घरेलू निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने, आधुनिक तकनीक के हस्तांतरण और “मेक इन इंडिया” को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
2019 में हुई थी स्थापना
2019 में स्थापित टेक्नोवेस ने बहुत कम समय में प्रीमियम वुड कोटिंग सेगमेंट में खुद को एक सशक्त घरेलू खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। स्थापना के बाद से कंपनी ने औसतन 43 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) हासिल की है, जो कि पेंट और कोटिंग उद्योग के औसत से कहीं अधिक है।
कंपनी प्रबंधन ने जताई खुशी
इस अवसर पर लखनऊ स्थित टेक्नोवेस की यूपी की C & F रंजना सिंह और यूपी हेड अभय कुमार सिंह ने खुशी जताते हुए कहा कि यह साझेदारी कंपनी के लिए एक नया अध्याय साबित होगी। इससे न केवल टेक्नोवेस की तकनीकी क्षमता मजबूत होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी की पहुंच बढ़ेगी।




