संवाददाता सऊद लखनऊ। सम्पूर्ण समाधान दिवस में बड़ी उम्मीद के साथ फरियादी न्याय पाने के लिए पहुंचते हैं। उन्हें भरोसा होता है कि अधिकारी उनके मामले को संज्ञान में लेते हुए उनकी सारी समस्याओं का हल कर देंगे, लेकिन शनिवार मलिहाबाद तहसील में आयोजित उक्त दिवस में ऐसा होता नहीं दिखा। 136 फरियादियों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी बात रखते हुए लिखित शिकायत की, जिनमें 32 मामलों को निस्तारित किया गया। शेष फरियादियों को फिर से निराश होकर लौटना पड़ा।
दरअसल, मलिहाबाद तहसील में शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस अयोजित किया गया। दोपहर तक अवैध कब्जा, फर्जी मुकदमा, अतिक्रमण, धोखाधड़ी जैसी समस्याओं को लेकर 136 फरियादियों ने जिलाधिकारी विशाख जी से मदद की गुहार लगाई, जिनमें 32 मामलों को ही निपटाने में अधिकारियों का दिन गुजर गया। हालांकि, जिलाधिकारी ने शेष समस्याओं को संबंधित अधिकारियों को इस हिदायत के साथ सौंपा कि निस्तारण समयांतर्गत और पूरी गुणवत्ता के साथ होना चाहिए। इसके साथ ही डीएम ने तहसील स्तर के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अवैध कब्जे, अतिक्रमण या भूमि विवाद से संबंधित जो भी मामले आए हैं, उसके लिए पुलिस और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम बना ली जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण के लिए अधिनस्थ कर्मचारी कोई भी रिपोर्ट मौका-मुआयना करने के बाद ही लगाएं। अधिकारियों से कहा कि अगर पहले की कोई शिकायत लंबित है तो उसे गंभीरता से देख लें।
मलिहाबाद के अल्लूनगर डिगुरिया गांव निवासी अजमल खान, इरफान, अशरफुल, जैद अहमद, अदीबा, अफसाना, नजमी और रहमान ने डीएम से मदद की गुहार लगाई है। लिखित शिकायत में ग्रामीणों ने बताया कि उनके मकान सरकारी इंण्टरलाकिंग के किनारे करीब 15 वर्ष पूर्व से बने हुए, जो अपने अपने मकान में निवास कर रहे है। उक्त रास्ते का निर्माण आसपास के किसानों ने आधी आधी भूमि देकर रास्ता बनवाया गया था जिसका सहमति पत्र भी सभी के पास है। जिसपर काफी समय से खड़ंजा लगा हुआ था। हाल ही में इंण्टर लाकिंग लगा हुआ है। आरोप है कि गांव के रहने वाले कुछ दबंगों ने जोर जबरदस्ती कर जमीन कब्जा ली और उस पर बाउन्ड्री बना ली। इस पर ग्रामीणों ने विरोध किया तो आरोपित एट्रोसिटी एक्ट का मुकदमा दर्ज करवाने की धमकी देने लगे। हालाकि मामले को संज्ञान में लेते हुए डीएम ग्रामीणों को कार्रवाई किए जाने का आश्वासन देते हुए मामले की जांच आदेश दिए हैं।




