August 8, 2026 2:23 am

डीजीपी ने गिनाई उपलब्धियां एक साल में ढेर हुए 48 अपराधी, साठ लाख पहुंचे सलाखों के पीछे 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। यूपी में एक साल के भीतर आतंक का पर्याय बने चार दर्जन कुख्यात बदमाश ढेर हुए जबकि साठ लाख अपराधी सलाखों के पीछे पहुंचे।

डीजीपी राजीव कृष्ण ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस कर अपराध के मामले में उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि सूबे में जीरो टॉलरेंस को लेकर सौ प्रतिशत पालन किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक साल के भीतर साठ लाख के करीब अपराधी गिरफ्तार किए गए, जबकि 48 बदमाश पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए।

दस हजार से अधिक को मृत्युदंड की सजा दिलाने में पुलिस कामयाब रही। डीजीपी ने दावा किया कि लूट, डकैती व दुष्कर्म जैसी घटनाओं में गिरावट आई एनसीआरबी में 181.3 देश का तीसरा स्थान है।

अपराधियों की कुंडली खंगालने के लिए 75 साइबर थाने बनाए गए। साइबर अपराध मामलों में 325.05 करोड़ की धनराशि फ्रीज कराई गई। जबकि 77621 मोबाइल फोन नंबर बंद कराए गए। 87 प्रतिशत अदालत में मजबूत पैरवी की गई। वहीं एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) भी पीछे नहीं रही प्रदेश में आतंक का पर्याय बने 331 तस्करों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा। वहीं अकूत संपत्ति हासिल करने वाले अपराधियों की 16 करोड़ की संपत्ति जब्त कराई गई। यूपी एसटीएफ ने भी कईयो खूंखार अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर और गिरफ्तार कर कामयाबी हासिल की। चोरी और पर्स लूटपाट करने वाले लुटेरों के 28 करोड़ के वाहन सीज किए गए। वहीं डीजीपी का दावा है कि मेटा के सहयोग से पुलिस ने 1769 को आत्महत्या करने से बचाया। उन्होंने बताया कि 16 जनपदों में फोरेंसिक लैब और सभी जिलों में फिल्ड यूनिट तैयार की जा रही है।

हत्यारे रहे बेअंदाज, बाकी पर कसी लगाम

सूबे की जनता दोतरफा मार का शिकार हो रही है। एक ओर महंगाई तो दूसरी तरफ उसे लूट, चोरी व हत्या जैसे अपराधों का सामना करना पड़ रहा है। मानों हर दिन बीस से अधिक ऐसी वारदातें हो रही है, जिन्हें जघन्य अपराधों की श्रेणी में रखा जाता है। पुलिस के आलाधिकारी भले ही साल-दर-साल अपराधों में गिरावट होने का दावा कर रहे हों, लेकिन कड़वा सच यह है कि जिलों में लगातार हुईं संगीन घटनाएं गवाही दे रहे हैं कि पूरे साल हत्यारे बेअंदाज रहे और पुलिस लकीर पीटती रही।

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