डॉक्टर सहित चार चढ़े पुलिस के हत्थे, नियम-कानून को दरकिनार कर करते थे गोरखधंधा
ए अहमद सौदागर लखनऊ। अगर मंजूर न था तुमको मेरा दुनिया में आना तो मेरे किसी दूसरे के हाथों सौदा क्यों कर लिया। गुडंबा थाना क्षेत्र स्थित सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक में बुधवार को एक ऐसा मामला सामने आया है कि सुनकर हर कोई दंग रह जाएगा।
एक महिला के संतान न होने पर औलाद पाने के लिए एक आरती नाम से अस्पताल के डॉक्टरों से मिलकर बच्चे को हासिल करने के लिए कहा। यह सुनते ही डॉक्टरों के मन में लालच आया और नियम-कानून को दरकिनार कर निःसंतान महिला को नवजात शिशु देने का वायदा कर लिया। जन्म होते ही बच्चे को महिला लेकर घर चली गई। इस गोरखधंधे की जानकारी मिलते ही थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग और गुडंबा पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और इस गोरखधंधे को अंजाम देने वाले डॉक्टर सहित चार लोगों को दबोच लिया। पुलिस नवजात शिशु को हजरतगंज क्षेत्र के पराग नारायण रोड स्थित राजकीय बाल गृह के सिपुर्द कर मामले की छानबीन शुरू कर दी।
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव के मुताबिक मंगलवार को सूचना मिली कि गुडंबा थाना क्षेत्र स्थित सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक में जन्मे एक नवजात शिशु को उसकी मां से अलग कर डॉक्टरों की मिलीभगत से दूसरी महिला को सौंप दिया गया तथा फर्जी दस्तावेज तैयार कर दूसरी महिला का नाम दर्ज किया गया।
उन्होंने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गहनता से छानबीन की तो मामला सही पाया गया।
जांच पड़ताल के दौरान रेनू नाम की महिला ने बताया कि उसके पास कोई बच्चा नहीं था और आरती नाम की महिला से तथा अस्पताल के डॉक्टरों से मिलकर बच्चे को हासिल करने की बात स्वीकार किया है।
पुलिस का कहना है कि इस मामले में आरोपी शांति विहार गुडंबा निवासी रेनू शर्मा पत्नी शिव कुमार शर्मा, बहादुर पुर गुडंबा निवासी आरती देवी पत्नी राजेश, गुडंबा क्षेत्र स्थित सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक की महिला डॉक्टर शालू डॉक्टर विनोद को पकड़कर मामले की छानबीन की जा रही है।
पुलिस आरोपी रेनू शर्मा से नवजात शिशु को सकुशल बरामद कर राजकीय बाल गृह के सिपुर्द कर दिया है। आरोपी महिला आरती देवी ने पुलिस को बताया कि उसके तीन बच्चे पहले से हैं तथा संतान न होने की वजह से अपना नवजात शिशु रेनू शर्मा को दे दिया था जो पूरी तरह से गैर कानूनी है। पुलिस मामले की गहनता से जांच पड़ताल कर रही है।




