August 8, 2026 2:14 am

दहेजलोभियों ने ली 3 माह की गर्भवती नवविवाहिता की जान, कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार खौफ में

मलिहाबाद लखनऊ। (संवाददाता) राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ शादी के महज एक साल के भीतर ही एक तीन माह की गर्भवती नवविवाहिता को दहेज की बलि चढ़ा दिया गया। ससुराल पक्ष के दहेजलोभियों द्वारा मारपीट कर की गई इस निर्मम हत्या के बाद पीड़ित पिता अब न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। स्थानीय पुलिस की ढीली कार्रवाई से क्षुब्ध होकर पीड़ित ने पुलिस महानिरीक्षक (IG), पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG), पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को शिकायती पत्र भेजकर आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और सुरक्षा की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

मलिहाबाद के ग्राम तिलस्वा निवासी जोगिंदर (पुत्र स्वर्गीय चुन्नीलाल) ने आलाधिकारियों को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उन्होंने लगभग 1 वर्ष पूर्व अपनी पुत्री रूपांशी यादव का विवाह ग्राम बुलबुल खेड़ा (भूल भूल खेड़ा) निवासी सुधीर (पुत्र श्रीपाल) के साथ अपनी हैसियत के अनुसार दान-दहेज देकर किया था।

रूपांशी 3 माह की गर्भवती थी, लेकिन शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज की अनुचित मांग को लेकर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर बीती 24 मई 2026 की रात को पति सुधीर, ननद निहारिका और नंदोई समर यादव (निवासी सैफलपुर) आदि ने मिलकर रूपांशी की बेरहमी से मारपीट कर निर्मम हत्या कर दी।

पीड़ित पिता जोगिंदर के अनुसार, घटना के अगले दिन 25 मई 2026 को उन्होंने थाने में नामजद तहरीर दी थी। मलिहाबाद पुलिस ने मुकदमा (मु.अ.सं. 0111/2026, धारा 80/2, 85 बीएनएस व दहेज प्रतिषेध अधिनियम) तो पंजीकृत किया, लेकिन खेल करते हुए मुख्य अभियुक्तों में से एक नंदोई समर यादव का नाम छोड़ दिया। इसके साथ ही मृतका के 3 माह के गर्भ की बात और उससे संबंधित जरूरी धाराएं भी एफआईआर में दर्ज नहीं की गईं।

घर में कैद होने को मजबूर पीड़ित परिवार, मिल रही जान से मारने की धमकी

आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से उनके हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब पीड़ित परिवार का जीना मुहाल हो गया है। जोगिंदर ने बताया कि विपक्षीगण लगातार मोबाइल फोन के माध्यम से और गांव के अन्य लोगों के जरिए उन पर केस में ‘सुलह’ (समझौता) करने का दबाव बना रहे हैं। सुलह न करने पर पूरे परिवार को जान से मार देने की लगातार धमकियां मिल रही हैं। इस खौफ के कारण पीड़ित और उनका पूरा परिवार डर के साये में अपने ही घर के भीतर कैद होकर जीने को मजबूर है।

पीड़ित की मुख्य मांगें छूटे हुए आरोपी नंदोई समर यादव का नाम मुकदमे में तुरंत जोड़ा जाए। मृतका के 3 माह के गर्भपात/भ्रूण हत्या से संबंधित सख्त धाराएं बढ़ाई जाएं। फरार चल रहे अन्य नामजद आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की जाए।

इस मामले में अब पीड़ित ने पुलिस महानिरीक्षक (उत्तर प्रदेश, लखनऊ) को दोबारा शिकायती पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है और देखना यह है कि आलाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मलिहाबाद पुलिस इस मामले में क्या रुख अपनाती है।

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