August 8, 2026 2:22 am

नई राह, नया हौसला – सर्टिफिकेशन कार्यक्रम में महिलाओं और लड़कियों को स्वशिक्षण यात्रा को सम्मान

लखनऊ। (संवाददाता) सद्भावना ट्रस्ट द्वारा निशातगंज में स्थित ऑल इंडिया कैफ़ी आज़मी अकेडमी में, नेतृत्व विकास कार्यक्रम का सर्टिफिकेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के अंतर्गत उन सभी लड़कियों और महिलाओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने साल भर अलग -अलग कार्यक्रमों (हम फेलोशिप, नए कौशल नई राहें और बेख़ौफ़ नज़रे) से जुड़कर अपने अंदर आत्मविश्वास, नेतृत्व और तकनीकी कौशल को मज़बूत किया। इस कार्यक्रम में लगभग 170 युवा महिलाएं एवं पुरुष साथी शामिल हुए। कार्यक्रम ने युवा महिलाओं को अनेकों रुचिकर प्रस्तुती से सीखने- सिखाने का मौका प्रदान किया।

 

कार्यक्रम के खास मौके पर कई सम्मानित अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई: अतिथि के रूप में मौजूद रहे- सोन कुमार– अल्पसंख्यक कल्याण ज़िला अधिकारी, कुशा दास– इम्पॉवरिंग विज़न’ संस्थापक, अनुराग पांडे –पूर्व पार्षद, ठाकुरगंज, प्रिया- रिसर्चर एंड राइटर, हमीदा खातून – सद्भावना ट्रस्ट की निदेशक और सामाजिक कार्यकर्ता, आपूर्वा श्रीवास्तव- सामाजिक कार्यकर्ता, एहतिशाम खान- अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन स्टडीज़, शफीक मिर्ज़ा– टीचर हुसौनाबाद इंटर कॉलेज, आमरा क़मर- सद्भावना ट्रस्ट कार्यक्रम प्रबंधक, काशिना- माझी संस्था संस्थापक, अफिना- बिजनेस वीमेन और रुबीना खातून- आँगन ट्रस्ट संस्थापक और सामुदायिक कार्यकर्त्ता।

 

अतिथियों का स्स्वागत करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत एक सुंदर शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति से हुई जिसने प्रेक्षाग्रह में मौजूद लोगों में उर्जा और उत्साह भर दिया। इसी कड़ी में कार्यक्रम से जुड़ी सभी महिला प्रतिभागियों ने कार्यक्रम से जुड़े अपने खूबसूरत अनुभव की रचनात्मक प्रस्तुति दी। प्रस्तुत कार्यक्रम-बेख़ौफ़ नज़रे और नए कौशल नई राहें कार्यक्रम की फिल्म स्क्रीनिंग, पॉडकास्ट, ग्रुप डांस, पिक्चर गैलेरी, मनोरंक खेल, प्रमाण पत्र वितरण और कार्यस्थल पर होने वाले यौन उत्पीड़न की रोकथाम) एक्ट पर नुक्कड़ नाटक। नुक्कड़ नाटक के ज़रिए मौजूद लोगों को जानकारी देते हुए बताया गया कि काम की जगह पर जब इस तरह की यौनिक हिंसा होती है तो इससे काम की दुनिया में महिलाओं की सहभागिता कम हो जाती है जिसका सबसे ज्यादा असर उन तमाम कामकाजी महिलाओं की गतिशीलता पर पड़ती है जो अपने परिवार का जीवन यापन करने के लिए बाहर निकती है।

 

फिल्म स्क्रीनिंग के माध्यम से पूरे साल युवा महिलाओं के साथ चलाये गए कार्यक्रम की झलक दिखाई गई। जिसमे दिखाया गया कि कैसे लड़कियाँ और महिलाएं डिजिटल दुनिया से जुड़ीं, कंप्यूटर सीखा, फोटोग्राफी, पोस्टर मेकिंग, करयर काउंसिलिंग, सीवी राइटिंग, इंटरव्यू स्किल्स, फाइनेंस लिट्रेसी और समुदाय में काम करने का व्यवाहरिक कौशल सीखे। कार्यक्रम में लगी तस्वीरों की गैलरी और रुचिकर खेलों ने भी सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर उनकी मेहनत और हौसले को सराहा गया।

आज का दिन सिर्फ एक समारोह नहीं था, बल्कि यह उन 200 महिलाओं और लड़कियों की मेहनत, संघर्ष और सफलता का उत्सव था, जिन्होंने हम फेलोशिप, नए कौशल नई राहें और बेख़ौफ़ नज़रे जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव किया है।

 

खदरा से आई रुबीना ने बताया कि “पहले मुझे कंप्यूटर से डर लगता था, लेकिन अब मैं डिजिटल दुनिया में आत्मविश्वास से कदम रख रही हूँ। बसंतकुंज से आई ख़ुशी ने बताया की “हम फेलोशिप ने मुझे मेरी आवाज़ दी। अब मैं अपने मोहल्ले की समस्याओं पर खुलकर बोल सकती हूँ। बरौरा से सायमा ने बताया की”बेख़ौफ़ नज़रें कार्यक्रम ने मुझे अपने निजी अनुभव साझा करने का खुला मंच दिया जिससे मुझे आत्मबल मिला।”

 

‘सद्भावना ट्रस्ट’ एक समुदाय-आधारित संस्था है, जो लखनऊ, उत्तर प्रदेश में ज़मीनी स्तर पर हस्तक्षेप, सामाजिक न्याय और महिलाओं एवं लड़कियों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है। यह 2009 से लखनऊ शहर की हाशिये ग्रस्त समुदाय और ज़रूरतमंद बस्तियों के साथ काम रही हैं। संस्था मुख्यतः लड़कियों और महिलाओं के साथ सामाजिक मुद्दो पर नज़रिया निर्माण करके उन्हें नेतृत्व में लाने का काम करती हैं। साथ ही युवा महिलाओं को तकनीकि कौशल का हुनर देते हुये उनको सशक्तीकरण एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

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