दो दर्जन से अधिक मासूम बच्चों की हुई मौत के बाद खुली जिम्मेदार अफसरों की आंख ए अहमद सौदागर लखनऊ। ताबड़तोड़ छापे, कार्रवाई भी खूब, इसके बावजूद आंकड़े मध्यप्रदेश राज्य और अन्य जगहों पर अवैध कफ सीरप की जो तस्वीर दर्शा रहे हैं वह काफी भयावह है। ज़हरीले कफ सीरप में भले ही मासूम बच्चों की जिन्दगियां सुलग रही हों, लेकिन जरायम की इस आंच को ठंडा करने में संबंधित विभाग नाकाम साबित दिख रहा है। बीते कुछ सालों से देश व प्रदेश के कोने-कोने में फैले तस्करों की नकेल कसने के लिए अभियान तो बहुत चले, लेकिन तब तक कई परिवारों का सहारा छीन चुका था।
संबंधित विभाग की लापरवाही का एसटीएफ और पुलिस ने किया राजफाश
नशे के लिए इस्तेमाल हो रहे ज़हरीले कफ सीरप के गोरखधंधे की बुनियाद तो मालूम नहीं कब से पड़ी, लेकिन मुख्य मास्टर माइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद जायसवाल, अमित टाटा, बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह सहित अन्य की हुई गिरफ्तारी ने पूरे औषधि विभाग के जिम्मेदार हाकिमों की पोल खोल कर रख दी।
दबोचे गए तस्करों ने पुलिस के सामने अपने नापाक मंसूबों को पेश किया तो बेहद ख़तरनाक था। कौन मरे कौन जिए इससे उन तस्करों का कोई लेना-देना नहीं, उनकी मंशा सिर्फ मोटी रकम हासिल करना।
बताया जा रहा है कि विदेश में बैठा वाराणसी निवासी शुभम जायसवाल और एसटीएफ के हत्थे चढ़ा चंदौली निवासी बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह मिलकर एक लंबी फौज तैयार कर रखा था। जहरीला कफ सीरप की सप्लाई सिर्फ देश-प्रदेश में ही नहीं मास्टर माइंड शुभम और बर्खास्त सिपाही आलोक की फौज में शामिल अन्य तस्करों ने विदेशों तक करते हैं।
पूर्व में पकड़ा गया सरगना का पिता भोला प्रसाद जायसवाल ने रांची में अपनी कंपनी मेसर्स शैली ट्रेडर्स के जरिए से बड़े पैमाने पर कफ सीरप की फर्जी बिलिंग कर अलग-अलग जिलों के अलावा कई राज्यों अवैध तरीके से सप्लाई किया।
खास बात यह है कि इतना खतरनाक जहर सालों से देश व प्रदेश से लेकर विदेशों तक बिकता रहा और संबंधित विभाग सोता रहा, इनकी नींद उस समय टूटी जब जहरीला कफ सीरप पीने से दो दर्जन बच्चों की जान चली गई, इसमें तीन साल की मासूम बच्ची भी शामिल है, जिसने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था।




