श्री डूंगरगढ़, बीकानेर। डॉ० अम्बेडकर सामाजिक एकता मंच की ओर से भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार श्री डूंगरगढ़, बीकानेर को सौंपा गया। यह ज्ञापन संगठन के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चन्द्र बरोड़ के नेतृत्व में प्रस्तुत किया गया।
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का दायरा वर्तमान कक्षा 8वीं (14 वर्ष की आयु) से बढ़ाकर कक्षा 12वीं (18 वर्ष की आयु) तक किए जाने की मांग की गई है।
प्रमुख बिंदु और मांगें:
12वीं कक्षा तक RTE का विस्तार:
RTE अधिनियम, 2009 में आवश्यक संशोधन करते हुए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की आयु सीमा को 14 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष (कक्षा 1 से 12वीं तक) किया जाए।
निजी विद्यालयों में 25% आरक्षित सीटों की निरंतरता:
निजी विद्यालयों में RTE के तहत प्रवेश लेने वाले निर्धन वर्ग के बच्चों को कक्षा 8 के बाद भी उसी विद्यालय में कक्षा 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा जारी रखने का अधिकार प्रदान किया जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के लक्ष्यों से संरेखण:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 3 से 18 वर्ष तक की शिक्षा को शामिल किया गया है। RTE में संशोधन करने से NEP 2020 के उद्देश्यों को पूर्ण कानूनी बल मिलेगा।
बालिकाओं की सुरक्षा और ड्रॉपआउट पर रोक:
कक्षा 8 के बाद आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छूटने की सबसे बड़ी मार निर्धन परिवारों की बच्चियों और असंगठित क्षेत्र के बच्चों पर पड़ती है। 12वीं तक मुफ्त शिक्षा मिलने से बाल विवाह और बाल श्रम पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
मांगकर्ता का वक्तव्य:
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चन्द्र बरोड़ ने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़े एवं वंचित वर्ग के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह कदम आवश्यक है। भारत को ज्ञान-आधारित वैश्विक महाशक्ति बनाने के संकल्प को सिद्ध करने में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। अतः केंद्र सरकार इस संदर्भ में अतिशीघ्र सकारात्मक निर्णय ले।




