August 8, 2026 2:19 am

निगहबानी: आतंकियों निगहबानी: आतंकी पनाहगाह रही राजधानी 

कश्मीर निवासी डॉ. मुजम्मिल गनी और लखनऊ निवासी डॉ शाहिन की गिरफ्तारी के बाद सच आया सामने

 

दिल्ली ब्लास्ट कांड के बाद खुफिया एजेंसियों ने मददगारों तक पहुंचने के लिए बिछाया जाल

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। देश की राजधानी दिल्ली के लाल किला मैट्रो स्टेशन के पास सोमवार को हुए धमाके से पहले एटीएस टीम ने एक महिला डॉक्टर सहित चार आतंकियों को पकड़कर पूछताछ करने की तैयारी कर रही थी कि इसी दौरान आतंकियों बम ब्लास्ट कर दिया। जानकार बताते हैं कि पुलिस लखनऊ में रहने वाली महिला डॉक्टर शाहिन शाहिद के इरादे ठीक नहीं थे। इस घटना से साफ लग रहा है कि एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकियों को छुड़ाने के लिए दहशतगर्दों ने दहशत फैलाकर बेगुनाहों की जान ले ली।

महिला आतंकी डॉक्टर शाहीन की हजरतगंज स्थित लालबाग से एके 47 हथियार के साथ हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर पुख्ता कर दिया कि उन्हें बड़ी वारदात करनी थी। एटीएस की छानबीन में इस तथ्य के सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां एक बार फिर लखनऊ में छिपे आतंकियों के मददगार तक पहुंचने के लिए अपने जाल बिछाकर जगह-जगह उनके संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है।

वास्तव में राजधानी लखनऊ लंबे समय से आतंकियों की पनाहगाह रही है। यहां विभिन्न आतंकी संगठनों के आतंकियों के आकर ठहरने व अपने नेटवर्क को संचालित करने का पुराना इतिहास रहा है।

गुजरात एटीएस, जम्मू-कश्मीर एटीएस व यूपी एटीएस अधिकारी गिरफ्तार आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल व महिला आतंकी डॉक्टर शाहीन सहित अन्य आतंकियों से गहनता से पूछताछ कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इनमें महिला आतंकी शाहीन और आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल का लखनऊ कनेक्शन सामने आने के बाद अब यहां छिपे आतंकियों के मददगारों की छानबीन तेज कर दी गई है।

दरअसल पिछले 15-20 सालों में लखनऊ में आतंकी संगठनों की जड़ें लगातार मजबूत हुई है।

सनद रहे कि बीते कुछ वर्ष पहले एटीएस ने एक आतंकी संगठन को असलहे सप्लाई करने के आरोप मॉडल हाउस निवासी इजहार खान को पकड़ा था।

पुलिस ने तब उसके कैसरबाग व अमीनाबाद निवासी एक दर्जन साथियों व मददगारों को चिन्हित करने का दावा भी किया था। इससे पूर्व 16 नवंबर 2009 को पुलिस ने पुराने लखनऊ से पाकिस्तान के जासूस आमिर अली को भी पकड़ा था। वहीं दिल्ली में वर्ष 2009 में पकड़े गए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी सलीम उर्फ यूसुफ से पूछताछ में सामने आया था कि वह लंबे समय तक यहां हसनगंज क्षेत्र स्थित एक हास्टल में ठहरा था। सिर्फ यही नहीं आरोपी ने यहां लविवि में एमए में दाखिला भी हासिल कर लिया था। 14 मई 2012 को दिल्ली पुलिस ने आतंकी शकील को लखनऊ के पास से ही गिरफ्तार किया था।

इन आतंकियों की छानबीन के दौरान पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने इनके कई स्थानीय मददगारों को भी चिन्हित किया था। छिपकर राजधानी में रहने वाले कई आतंकियों को उनके स्थानीय मददगारों ने राशन कार्ड व डीएल तक मुहैया कराए थे।

 

गहरी है आतंकियों की जड़ें

21 मई 2005 – एसटीएफ ने लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य रशीद व इमरान को पकड़ा।

28 दिसंबर 2006- कैसरबाग में आईएसआई एजेंट अब्दुल शकूर व अदील पकड़े गए, इनके पास से सेना के कागजात, लखनऊ में बना पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज बरामद हुए।

27 फरवरी 2007- लखनऊ कचहरी से दो आतंकी फरार, शौचालय में दोनों को मुहैया कराए गए थे असलहे।

23 जून 2007- पुलिस ने हूजी के एरिया कमांडर बाबू भाई व उसके साथी नौशाद को पकड़ा।

27 जुलाई 2007- एसटीएफ ने लखनऊ – कानपुर रोड स्थित इंडस्ट्रीयल एरिया से आतंकी नूर इस्लाम की निशानदेही पर आरडीएक्स बरामद किया।

16 नवंबर 2007- एसटीएफ ने जैश – ए – मोहम्मद के तीन आतंकियों को पकड़ा।

12 अगस्त 2008- एसटीएफ ने जमात-उल- मुजाहिद्दीन के आतंकी मसरूर को पकड़ा, चारबाग स्थित रेलवे स्टेशन क्वाटर में लंबे समय से रहकर एक शोरूम में नाम बदलकर नौकरी कर रहा था आरोपी।

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