चारबाग रेलवे के पास से पकड़े गए आतंकियों को भी लखनऊ में लेनी थी पनाह
यूपी एटीएस और खुफिया एजेंसियों ने अन्य मददगारों तक पहुंचने के लिए बिछाया जाल
इंस्टाग्राम के जरिए देश विरोधी पाकिस्तान को देते थे सूचना: एडीजी कानून-व्यवस्था
ए अहमद सौदागर लखनऊ। यूपी एटीएस ने राजधानी लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के पास से शुक्रवार को जिन चार आतंकियों को पकड़ा था, उनका इरादा बेहद ख़तरनाक था। जानकार बताते हैं कि उन्हें बड़ी वारदात करने के बाद लखनऊ में कहीं पनाह लेनी थी। एटीएस की छानबीन में इस तथ्य के सामने आने के बाद खुफिया एजेंसियां एक बार फिर यहां छिपे आतंकियों के मददगारों तक पहुंचने के लिए अपने जाल बिछा रही है। गौर करें तो वास्तव में राजधानी लंबे समय से आतंकियों की पनाहगाह रही है। यहां विभिन्न आतंकी संगठनों के आतंकियों के आकर ठहरने व अपने नेटवर्क को संचालित करने का पुराना इतिहास रहा है।
सूबे के एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक यूपी एटीएस को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के जरिए से एक आतंकी संगठन गिरोह है जो देश विरोधी पाकिस्तान हैंडलर के लगातार संपर्क में है और देश विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहा है। उन्होंने बताया कि जनपद मेरठ के अगवानपुर निवासी अरबाज, मेरठ निवासी साकिब उर्फ डेविड जो आतंकी गिरोह का मुख्य सरगना है। साकिब नाई की दुकान चलाने की आड़ में आतंकी संगठनों के लिए काम करता है। बताया जा रहा है कि आतंकी संगठन के काम करने वाला साकिब, अरबाज, शकील, विकास गहलोत उर्फ रौनक व गौतमबुद्ध नगर निवासी लोकेश उर्फ पपला ये लोग पाकिस्तान हैंडलर को भेजकर क्यूआर कोड के जरिए से रुपए मंगवाए जाते हैं।
एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने बताया कि पाकिस्तानी हैंडलर टेलीग्राम व इंस्टाग्राम के जरिए ओसामा बिन लादेन, इंडियन मुजाहिदीन, गजवा – ए -हिन्द एवं धर्म के आधार पर वाहनों को आग के हवाले करने के लिए षडयंत्र रचा था। बताया जा रहा है कि एटीएस के हत्थे चढ़े साकिब उर्फ डेविड, विकास गहलोत उर्फ रौनक, लोकेश उर्फ पपला पंडित व अरबाज ने पूछताछ में कई अहम राज उगले हैं।
वहीं जानकार सूत्र बताते हैं कि इन लोगों का लखनऊ कनेक्शन आने के बाद अब यहां छिपे आतंकियों के मददगारों की छानबीन तेज कर दी गई है।
दरअसल पिछले कुछ सालों में राजधानी लखनऊ में आतंकी संगठनों की जड़ें लगातार मजबूत हुई है। देश की राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम धमाके के मामले में भी लखनऊ में रहने वाली महिला डॉक्टर सहित कई लोगों का नाम सामने आया था।
गौर करें तो इससे पहले वर्ष 2009 में पुलिस ने पुराने लखनऊ से पाकिस्तान के जासूस आमिर अली नाम के शख्स को पकड़ा था। वहीं दिल्ली में वर्ष 2009 में लश्कर ए तैयबा के आतंकी सलीम उर्फ यूसुफ पकड़ा गया था। यूसुफ से पूछताछ में सामने आया था कि वह लंबे समय तक राजधानी लखनऊ में पनाह लिए हुए था।
14 मई 2012 को दिल्ली पुलिस ने आतंकी शकील को लखनऊ के पास से ही गिरफ्तार किया था। यह तो फिलहाल बानगी भर है और भी कई आतंकियों को एसटीएफ, एटीएस व पुलिस लखनऊ से दबोच चुकी है। संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह भी यहीं की जमीन पर ढेर हुआ था।




