आजमगढ़ जिले के रौनापार क्षेत्र में हुई मुठभेड़ का मामला
लखनऊ। (संवाददाता) हत्या, लूट, गौ-तस्करी सहित कई मामले में काफी दिनों से फरार चल रहे पचास हजार रुपए के इनामी बदमाश वाकिफ को यूपी एसटीएफ टीम आजमगढ़ जिले के रौनापार थाना क्षेत्र में शुक्रवार पसुबह तड़के मुठभेड़ में ढेर कर दिया। वाकिफ अपने कुछ साथियों के साथ यहां किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में मंडरा रहा था कि एसटीएफ टीम का आमना-सामना हो गया और हमेशा के लिए उसका खात्मा हो गया। एसटीएफ को मौके से अवैध असलहा व कारतूस बरामद हुए हैं।
एसटीएफ के डीएसपी डीके शाही के मुताबिक मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि वाकिफ और उसके तीन साथी थाना रौनापार क्षेत्र की ओर भाग रहे। इस पर टीम ने उनकी घेराबंदी की।
जैसे ही बदमाशों को घेरा गया, उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। एसटीएफ की जवाबी कार्रवाई में वाकिफ को गोली लग गई। गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा। पुलिस उसे हरैया स्थित अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
अंधेरे का फायदा उठाते हुए मुठभेड़ में ढेर हुए वाकिफ के तीन साथी मौके से भाग निकले।
एसटीएफ टीम का नेतृत्व डिप्टी एसपी डीके शाही कर रहे थे। यह वही डीके शाही हैं, जिन्होंने सुल्तानपुर डकैती कांड में वांटेड मंगेश यादव भी मुठभेड़ में मार गिराया था।
बताया जा रहा है कि मुठभेड़ में ढेर हुआ कुख्यात बदमाश वाकिफ आजमगढ़ जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र स्थित नियाऊ गांव का रहने वाला था।
डीएसपी एसटीएफ डीके शाही ने बताया कि मारे गए बदमाश वाकिफ के खिलाफ हत्या, चोरी, लूट व गौ-तस्करी सहित कुल 48 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें सबसे अधिक आजमगढ़, गोरखपुर व जौनपुर जिले में अलग-अलग थानों में दर्ज है।
बताया जा रहा है कि वह अपने गिरोह के साथ मिलकर दूध देने वाले पशुओं की चोरी और गोवंश की अवैध तस्करी भी करता था।
वाकिफ कई सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस के आलाधिकारियों ने पचास हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। बताया जा रहा है कि आठ वर्ष पहले पहली घटना को अंजाम दिया था।
27 वर्षीय वाकिफ किसी के साथ नहीं बल्कि खुद ही गिरोह चलाता था, लेकिन शुक्रवार को उसके आतंक का किला ढह गया।
वाकिफ के पिता कलाम उर्फ सलाम मजदूरी और फेरी का काम करते हैं। वाकिफ ने 2015 में अपराध की दुनिया में कदम रखा। आजमगढ़ के सरायमीर थाने में उस पर पशु चोरी का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था।
इसके बाद वह लगातार अपराध करता चला गया और उसने अपना अलग गिरोह बना लिया था । वह गिरोह के साथ मिलकर दूध देने वाले पशुओं की चोरी और गोवंश की अवैध तस्करी करता था। गिरोह में अरशद, राकेश उर्फ राका, जावेद, मेराज, सुरेंद्र यादव, शहजादे उर्फ छेदी, मोहम्मद आकिल, हसीम उर्फ शेरू और शकील उर्फ भीमा जैसे खूंखार अपराधी शामिल थे।




