24 से 26 घंटे तक लावारिस वाहन की तरह खड़ी रही सेंट्रो कार, फिर भी नहीं पहुंची पुलिस की नजर
काश पहले पहुंच जाती पुलिस तो शायद बच सकती थी दरोगा की जान, लेकिन नहीं जागी पारा पुलिस
ए अहमद सौदागर लखनऊ। एक सेंट्रो कार बुद्धेश्वर-मोहान रोड पर पिछले 24-26 घंटे तक लावारिस वाहन की तरह खड़ी रही। लोगों की आवाजाही के साथ सायरन बजाती हुई गाडियां भी गुजर रहीं थीं। कार के भीतर एक शख्स की लाश पड़ी थी। लेकिन किसी पुलिसकर्मी ने गश्त के दौरान उस कार के बारे में जानकारी लेना गंवारा नहीं समझा, यह हाल है पारा पुलिस का।
स्थानीय पुलिस की नींद उस समय टूटी, जब शुक्रवार को खड़ी कार में गाजीपुर थाने में तैनात 34 वर्षीय दरोगा अजय कुमार की संदिग्ध हालात में शव मिला। इस घटना ने पुलिस चौकसी की पोल खोल दी।
यू तो शहर में तेज रफ्तार या फिर सड़क किनारे खड़ी वाहनों को देख पुलिसकर्मी वाहन चालकों पर झपट पड़ते हैं, लेकिन 24-26 घंटे तक कार के भीतर दरोगा अजय कुमार बदहवास हालत में पड़े रहे और क्षेत्र में चेकिंग तथा गश्त करने का दावा करने वाली पुलिस की कलई खुल गई। पुलिस की भागदौड़ उस समय देखने को मिली जब शुक्रवार को दरोगा अजय कुमार कार में मृत अवस्था में पड़े मिले।
अजय कुमार कार के भीतर दम तोड़ दिया, लेकिन कहीं चेकिंग नहीं हुई कि आखिर किस शख्स की यह कार।
अक्सर पुलिस की डायल 112 की वाहन या फिर लेपर्ट पर पुलिसकर्मी मौजूद रहने के अलावा स्थानीय पुलिस की गाड़ियां दौड़ती रहती है, इसके बावजूद किसी भी पुलिसकर्मी की उस कार पर नजर नहीं पड़ी। पुलिस समय पर जाग जाती तो शायद बहादुर दरोगा अजय कुमार की जान बच सकती थी।




