नामजद रिपोर्ट दर्ज, तलाश में पुलिस की पांच टीमें रवाना
सतवा गांव में हुई घटना का मामला, इलाके में फैली सनसनी, पुलिस फोर्स मौके पर
ए अहमद सौदागर लखनऊ। बीती 27 मई 2026 को जौनपुर निवासी प्रापर्टी डीलर संदीप सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हुई हत्या को लोगबाग भुला भी नहीं पाए थे कि पीजीआई क्षेत्र स्थित सतवा गांव में शुक्रवार दोपहर बाद करीब चार बजे दो पक्षों के बीच हुई मारपीट के दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने 27 वर्षीय अभिषेक रावत की बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या की खबर मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और देखते ही देखते तमाम ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते अपर पुलिस उपायुक्त रल्ला पल्ली वसंथ कुमार सहित कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और खून से लथपथ पड़े युवक को ट्रामा सेंटर भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से भाग निकले। पुलिस ने घरवालों की ओर से नामजद रिपोर्ट दर्ज की है। अपर पुलिस उपायुक्त रल्ला पल्ली वसंथ कुमार के मुताबिक नामजद आरोपियों की तलाश में पुलिस की पांच टीमें लगाई गईं हैं। उन्होंने बताया कि फरार हमलावरों की तलाश में पुलिस की टीमें उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
पूरे घटनाक्रम पर एक नजर
पीजीआई थाना क्षेत्र स्थित सतवा गांव निवासी विनोद रावत परिवार के साथ रहते हैं। बताया जा रहा है कि गांव के ही रहने वाले कुछ लोगों से किसी बात को लेकर रंजिश चल रहे थी कि शुक्रवार दोपहर बाद करीब चार बजे दोनों पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। कहासुनी के बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने विनोद रावत के 27 वर्षीय बेटे अभिषेक रावत को पीट-पीटकर मौत की नींद सुला दिया और मौके से भाग निकले।
अपर पुलिस उपायुक्त रल्ला पल्ली वसंथ कुमार ने बताया कि खबर मिलते ही इंस्पेक्टर पीजीआई दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और खून से लथपथ पड़े अभिषेक रावत को इलाज के लिए ट्रामा सेंटर भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। अपर पुलिस उपायुक्त का कहना है कि आरोपितों की तलाश में पुलिस की पांच टीमें लगाई गईं हैं और उम्मीद है कि जल्द ही पकड़ लिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि उधर एहतियात के तौर पर सतवा गांव में भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है। अपर पुलिस उपायुक्त रल्ला पल्ली वसंथ कुमार के मुताबिक इस मामले में कई बिंदुओं पर गहनता से छानबीन की जा रही है। खबर लिखे जाने तक हमलावरों के नाम पता नहीं चल पाया था।




