August 8, 2026 2:15 am

पुलिस पर उठती रहती हैं उंगलियां, सबसे लापरवाह निकला एलडीए विभाग 

एलडीए की छवि: तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग के बाद खुली पोल

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। अलीगंज क्षेत्र में सोमवार को तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण और इसकी चपेट में आकर 15 बच्चों की हुई मौत ने मानो सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया। इस भयावह घटना के शिकार हुए उन बच्चों के घरवालों ने मीडिया के सामने दर्द बयां किया तो हर कोई गमजदा हो गया।

वारदात के बाद आसपास के रहने वाले और प्रत्यक्षदर्शियों ने जो कुछ कहा उससे एलडीए विभाग की छवि पर बुरा असर पड़ना तय है। हालांकि एलडीए के आलाधिकारी अपनी सफाई के जरिए खुद को चुस्त-दुरुस्त और पाक-साफ बताने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे अपनी नाकामी बताने में शासन को कोई जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि आखिर वह लिखित में क्या जवाब दें?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त तेवर देख आनन-फानन में अग्निकांड वाली इमारत को ध्वस्त करने के लिए नोटिस तो जारी कर दिया, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इससे पहले कहां था एलडीए विभाग। क्या उसे किसी बड़े हादसे का इंतजार था, बेसक अगर एलडीए विभाग पहले चेता होता तो शायद उन मासूमों की जान बच सकती थी।

इसी तरह इस सवाल का जवाब आना भी शेष है कि आखिर एलडीए विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने क्यों लापरवाही बरती, क्या इतनी बड़ी लालच कर बैठे। लोगबाग भले ही पुलिस महकमे उंगलियां उठाते फिरते हों, लेकिन कड़वा सच यह है जिस तरह से बड़ी-बड़ी इमारतें खतरे के मुहाने पर हैं इससे यही लग रहा है कि काफी प्रतिशत बिना नक्शा के ही खड़ी हो गईं हैं। इससे साफ है कि कहीं न कहीं एलडीए विभाग भ्रष्टाचार के समंदर में इस कदर गोते लगा रहा है कि वह बेफिक्र होकर अपने दफ्तर में बैठकर पूरी हुकुमत चला रहे हैं। जानकार बताते हैं कि यह एक ऐसा विभाग है जो बिल्डिंग बनवाता भी और मोटी रकम न मिलने पर गिरवाता भी है? वाह विभाग आखिर कब तक लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ करेगा?

पुलिस और फायर ब्रिगेड की भूमिका को लेकर जो तमाम नए सवाल उठ खड़े हुए हैं उनका जवाब तभी सही मिल सकता है जब मामले की कोई गहन जांच हो कि आखिर असली गुनहगार कौन है? पुलिस, फायर ब्रिगेड या फिर एलडीए विभाग।

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