मलिहाबाद लखनऊ। (संवाददाता) राजधानी लखनऊ की काकोरी विकास खण्ड के ग्राम पंचायत सिरगामऊ के मजरा गाँव चतुरीखेडा़ के ग्रामीणों ने सरकार के मर्जरनीति के चलते प्राथमिक विद्यालय चतुरीखेडा़ का विलय गाँव से 2 से 3 किमी दूर सिरगामऊ प्रा. विद्यालय में होने का विरोध करते हुए विलय रोकने हेतु बेसिक शिक्षाधिकारी लखनऊ को अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए रोकने की मांग की है
छतरी खेड़ा के ग्रामीणों ने अपनी समस्या बताते हुए बताया की हमारे गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में 47 बच्चे होने के उपरांत भी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक के द्वारा अभिभावकों से अनजाने में अ नभिज्ञता का फायदा उठाते हुए शिक्षा समिति के सदस्यों से हस्ताक्षर करवा कर अनापत्ति लगा दी जबकि चतुरी खेड़ा ग्राम वासियों ने बताया कि हमारे प्राथमिक विद्यालय में गांव से छोटे-छोटे बच्चे कक्षा 1 से कक्षा 5 तक पढ़ने जाते हैं जिनकी संख्या करीब 47 के आसपास है तथा अन्य सात आठ बच्चों का एडमिशन होना था जिसको प्रधानाध्यापक चतुरीखेड़ा राकेश कुमार सिंह के द्वारा मनमाने ढंग से बच्चों का एडमिशन ना करके संख्या पूरी नहीं की जिस कारण हमारा विद्यालय शिरगांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में जो कि हमारे गांव से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तथा रास्ते में पढ़ने वाले मृत पशु निस्तारण स्थल तथा आगे सिर्गमो गांव में रास्ते पर ही खुले दारू के ठेके के आसपास की गतिविधियों से डरे सा मेरे अभिभावक व बच्चे किसी अनहोनी के दर से अपने बच्चों को इस विलय नीति के विरोध में जाकर अपने बच्चों के भविष्य के लिए ग्राम पंचायत स्थित विद्यालय में विलय रोक कर गांव में ही स्थित प्राथमिक विद्यालय पुणे शुरू किए जाने की मांग बेसिक शिक्षा अधिकारी से लिखित रूप में प्रार्थना पत्र देकर अपनी मांग को दोहराया है वहीं प्राथमिक विद्यालय चतुरी खेड़ा की सहायक अध्यापिका फरहा फातिमा ने बताया की हम विद्या विद्यालय के बच्चों को पढ़ने में पूर्ण रुचि रखते हैं हमें इसी विद्यालय में बच्चों को पढ़ने में अत्यधिक सुविधा है तथा सरकार द्वारा लागू मर्जर नीति के अंतर्गत विद्यालय के विलय को रोक कर प्राथमिक विद्यालय चतुरी खेड़ा पुनः मानक अनुसार संख्या होने की दशा में सुरू होने कीबात कही।
ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक पर लगाए गंभीर आरोप
चतुरीखेड़ा गाँव के ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय चतुरीखेड़ा में नियुक्त प्रधानाध्यापक अशोक कुमार सिंह किसी दूसरे के नाम पर शिक्षण कार्य कर रहे थे जिसकी जानकारी उन्हें शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों व अध्यापकों के द्वारा प्राप्त हुई तथा प्रधानाध्यापक अशोक सिंह अपने स्थानांतरण को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में नए प्रवेश नहीं किया जिससे विद्यालय में बच्चों की संख्या पूर्ण नहीं हुई तथा विद्यालय विलय होने से उनके स्थानांतरण में आ रही बाधा दूर हो गई तथा वह अपने मन माफिक विद्यालय सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र में किसी गांव में करवा लिया है तथा यहां ग्राम वासियों से फर्जी तरीके से उनकी अज्ञानता का लाभ उठाते हुए विद्यालय विलय करवा दिया तथा ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से उक्त प्रधानाध्यापक के खिलाफ जांच किए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया की हम सभी ग्रामीण कृषि मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं जो सुबह से ही मजदूरी व खेतों पर काम करने चले जाते हैं तथा बच्चे लगभग गांव से 200 मीटर दूर अपने विद्यालय चले जाते हैं जिससे उन मासूम बच्चों को कोई परेशानी नहीं होती है वही अब विद्यालय विलय हो जाने से बच्चों को 2 से 3 किलोमीटर ज्यादा गर्मी वह बरसात में आने जाने में अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा तथा मासूम बच्चे थक कर चूर हो जाएंगे उनको दो किलोमीटर जाना और 2 किलोमीटर आना उनकी समस्त दिनचर्या और अवस्था को देखते हुए असंभव है तथा अब हमारे सामने यही एक रास्ता रह गया है की या तो मजदूरी करने जाऐं या अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दो किलोमीटर दूर उनको सुरक्षित छोड़ने जाएं तथा विद्यालय बंद होने के समय उन्हें लेने जाएं जिससे हम मजदूरी नहीं कर पाएंगे तथा हमारे सामने रोजी-रोटी का संकट या बच्चों की शिक्षा व उनके भविष्य दो में से एक को चुनना अब कठिन हो रहा है क्योंकि यदि बच्चे की शिक्षा करवाते हैं तो रोजी-रोटी में घर के अन्य सभी सदस्य भूखे मरने की कगार पर पहुंच जाएंगे और यदि रोजी-रोटी में लगते हैं तो आने वाले भविष्य में हमारे गांव के वह हमारे बच्चों की शिक्षा रुक जाएगी वह अशिक्षित ही बने रहेंगे तथा सरकार की सर्व शिक्षा अभियान नीति पर बहुत बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा इसी समस्या व बच्चों के भविष्य पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए हम सक्षम अधिकारियों से यह मांग करते हैं कि हमारे प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या जो भी कम पड़ रही है उसके लिए हमारे यहां छात्र जो की 7 से 8 वर्ष के हो चुके हैं उनका प्राथमिक विद्यालय में लिखकर सरकार द्वारा निहित संख्या पूरी कर विद्यालय शुरू किए जाने का अनुरोध किया है।




