August 8, 2026 2:11 am

प्लानिंग: अपहर्ताओं की नासमझी ने आसान किया पुलिस का काम 

खुद को डॉक्टर बताते वाला श्यामजी निकला मास्टरमाइंड 

कुछ दिनों तक योजना बनाने के बाद अगवा किया मासूम बच्ची को 

चौक थाना क्षेत्र में हुई घटना का मामला 

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। इस अपहरणकांड ने न केवल अधीनस्थों को मुश्किल में डाला, बल्कि पुलिस के आलाधिकारियों को भी परेशान किया। लिहाजा इसके खुलासे के लिए तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों सहित इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में माहिर हाईटेक पुलिसकर्मियों को लगाया गया। पुलिस की टीमें आसपास में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अभी जाल बिछाना शुरू ही किया था कि अपहरणकर्ताओं की नासमझी के प्रमाण मिलने शुरू हो गए।

जानकार सूत्र बताते हैं कि अपहर्ता पिछले कुछ दिनों से मासूम बच्चे और बच्चियों को अगवा करने की तैयारी कर रहे थे।

वारदात के दौरान कदम-कदम पर की गई गलतियों ने पुलिस को यकीन दिला दिया कि अपहरण में पेशेवर गिरोह शामिल नहीं है। पुलिस को अब सिर्फ सर्विलांस और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज के जरिए अपहरणकर्ताओं की हर नजर रखनी थी, जिसमें वह कामयाब हुई। हालांकि पुलिस की सक्रियता की आहट होते ही डेढ़ वर्षीय मासूम बच्ची को अगवा करने वाले अपहरणकर्ताओं ने बच्ची को आलमबाग क्षेत्र में छोड़ कर भाग निकले थे।

हालांकि पुलिस टीम शुरू से ही मासूम बच्ची की सलामती का ख्याल रखते हुए कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई, लिहाजा बच्ची सकुशल बरामद हो गई और अपहरण करने वाले अपहरणकर्ता सलाखों के पीछे पहुंच गए।

जांच पड़ताल में जुटे एक पुलिस अधिकारी बताते हैं कि अपहरण में शामिल बदमाश सर्विलांस से बिल्कुल अनभिज्ञ थे। इसलिए उन्होंने कदम-कदम पर चूक कर पुलिस का काम आसान कर दिया।

पकड़े गए अपहरणकर्ताओं ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह हरदोई निवासी शेर सिंह को बच्चा देने के लिए ढाई-तीन लाख रुपए का सौदा किया था, लेकिन लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस की तत्परता से धर लिए गए।

पुलिस उपायुक्त पश्चिमी के मुताबिक इस गिरोह का मास्टरमाइंड खुद को डॉक्टर बताने वाला काकोरी निवासी श्यामजी यादव इससे पहले साईं नाम से अस्पताल चलाता था, जहां नाका क्षेत्र स्थित मवैया नेहरू नगर निवासी मोहम्मद सुल्तान का आना-जाना लगा रहता था। उन्होंने बताया कि इनकी गर्दन तक पहुंचने के लिए सर्विलांस टीम और इंस्पेक्टर चौक नागेश उपाध्यक्ष की संयुक्त टीम को लगाया गया। यहीं से अपहरणकर्ताओं की पोल खुलनी शुरू हो गई। मजे की बात यह है कि अपहरणकर्ताओं ने अपने-अपने मोबाइल फोन को बंद नहीं किया, जिससे पांचों अपहरणकर्ताओं का लोकेशन मिलता गया तभी पुलिस को इनके पुख्ता सबूत हाथ लग गए और सभी आरोपित सलाखों के पीछे पहुंच गए। पुलिस उपायुक्त पश्चिमी ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपितों रिमांड लिया जाएगा। पुलिस के मुताबिक यह घटना 13 जुलाई 2026 देर रात हुई थी जब बाराबंकी निवासी झब्बू मजदूरी करने के बाद एक मेडिकल के बरामदे में पत्नी व डेढ़ वर्षीय मासूम बेटी के साथ गहरी नींद में सो रहे थे तभी बाइक सवार बदमाशों ने मासूम बच्ची को अगवा कर सनसनी फैला दी थी।

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