गम-ए-हुसैन के नाम शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों में लगीं सबीलें, ईदगाह चिनहट कमेटी की ओर से पिलाया जा रहा शर्बत व पानी
ए अहमद सौदागर लखनऊ। मोहर्रम का चांद दिखाई देते ही पुराना लखनऊ के अलावा सभी क्षेत्र गम-ए-हुसैन में डूब गया। इमामबाड़े सजा दिए गए। महिलाओं ने चांद देख अपने सुहाग की निशानी चूड़ियों को ताजिए के आगे तोड़ दिया। रात से ही इमामबाड़ों में मजलिसों का दौर शुरू हो गया। साथ ही शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में भी जगह-जगह शरबत और पानी पिलाने का सिलसिला शुरू हो गया है। वहीं चिनहट कस्बा स्थित ईदगाह चिनहट कमेटी की ओर से शर्बत व पानी पिलाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया है और यह दौर अशरा यानी मोहर्रम के समापन तक चलता रहेगा।
वहीं महिलाओं ने चांद देखकर पढ़ा जाने वाला नौहा पढ़ा… फलक पे भाई के मातम का चांद देख लिया। बहन ने आह मोहर्रम का चांद देख लिया…
यह नौहा सुनते ही लोगों की आंखों से आंसू निकल पड़े। ताजियों की बिक्री शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि रौजा-ए-काजमैन सहित कई जगहों पर ताज़िए की बिक्री शुरू हो गई है। वहीं मौलाना कल्बे जवाद सहित कई उलमाओं ने चांद रात मजलिसों को खिताब किया। काले कपड़े पहन कर लोग देर रात तक मजलिसों में शरीक हुए। हज़रत इमाम हुसैन के मदीना से सफर का जिक्र और इमाम के मुसीबत का जिक्र मजलिसों में हुआ। वहीं ईदगाह चिनहट के सदर बाबा मोहम्मद शफीक ने कहा कि यह एक ऐसा बाबरकत महीना है जो भी शख्स दिल से दुआ मांगेगा उसकी हर ख्वाहिश पूरी होती है। उन्होंने कहा कि हर किसी की कोशिश हो कि इस पवित्र महीने में भूखे-प्यासे लोगों की मदद जितनी हो सके करना चाहिए।




